किन्नर कैलाश यात्रा के विरोध में उतरे ग्रामीण, रिकांगपिओ में रैली-प्रदर्शन कर डीसी को सौंपा ज्ञापन हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टुकपा-खुनाग क्षेत्र की कई पंचायतों के ग्रामीणों और देव समाज से जुड़े लोगों ने आज रिकांगपिओ में आक्रोश रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने डीसी किन्नौर को ज्ञापन सौंपा और किन्नर कैलाश यात्रा को पूरी तरह बंद करने की मांग की। स्थानीय निवासी जिया लाल नेगी ने कहा कि उनका विरोध किसी की धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि किन्नर कैलाश की पवित्रता, स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए है। उनका आरोप है कि यात्रा के दौरान स्थानीय मान्यताओं, देव आदेशों और परंपराओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा प्रभावित हो रही है। देवता के यात्रा बंद करने के आदेश: राम लाल राम लाल नेगी ने कहा कि पोवारी, रिब्बा सहित कई गांवों के कुल देवताओं ने देववाणी के माध्यम से किन्नर कैलाश यात्रा को पूर्ण रूप से बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी-छिपे यात्रा कर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पवित्र स्थल पर गंदगी फैल रही है। जल स्रोतों, दुर्लभ वनस्पतियों और प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। रोक के बावजूद चोरी-छिपे यात्रा जारी ज्ञान देवी, स्नेह नेगी और परमेश्वर नेगी ने कहा कि क्षेत्र के देवी-देवताओं के आदेश के बाद पहले भी प्रशासन को ज्ञापन देकर यात्रा बंद कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि चोरी-छिपे यात्रा जारी है और प्रशासन इसे रोकने में विफल रहा है। यात्रा नहीं रोकी तो आंदोलन उग्र करेंगे प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किन्नर कैलाश यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने और अवैध रूप से यात्रा करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो देव समाज और ग्रामीण फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। गौरतलब है कि प्रशासन ने भी यात्रा मार्ग पर लगातार भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़े खतरों को देखते हुए किन्नर कैलाश यात्रा को अगले आदेशों तक स्थगित कर रखा है। इसके बावजूद कथित तौर पर कुछ लोग अवैध रूप से यात्रा कर रहे हैं, जिसे रोकने में प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए। किन्नर कैलाश यात्रा क्या है? किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित एक अत्यंत पवित्र पर्वत शिखर है। हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यहां स्थित प्राकृतिक शिलाखंड (शिवलिंग) भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। यह शिवलिंग लगभग 79 फीट (करीब 24 मीटर) ऊंचा बताया जाता है और समुद्र तल से लगभग 4,800 मीटर (करीब 15,700 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। धार्मिक महत्व मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का निवास किन्नर कैलाश पर्वत पर है। किन्नौर के स्थानीय लोग इसे अपने प्रमुख देवस्थलों में गिनते हैं। हिंदू श्रद्धालु इसे कैलाश पर्वत का ही एक पवित्र स्वरूप मानकर दर्शन करने जाते हैं। स्थानीय किन्नौरी संस्कृति में यह केवल तीर्थ नहीं, बल्कि देव परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र भी है। यात्रा कब होती है? किन्नर कैलाश यात्रा सामान्यतः जुलाई से अगस्त के बीच आयोजित होती है। यात्रा का प्रमुख मार्ग टांगलिंग गांव (कल्पा के पास) से शुरू होता है। यह बेहद कठिन ट्रेक है, जिसमें श्रद्धालुओं को लगभग 18–20 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई तय करनी पड़ती है। इस यात्रा के लिए देशभर से श्रद्धालु किन्नर कैलाश आते है।

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