हमीरपुर जिले की ग्राम पंचायत टीहरा के अंतर्गत आने वाले ‘श्री कृष्ण लीला धाम’ (वार्ड नंबर-5) में उस समय हड़कंप मच गया, जब मंदिर परिसर में एक विशालकाय 9 फीट लंबा अजगर देखा गया। यह अजगर मंदिर में बनी कमल के फूल की आकृति पर कुंडली मारकर बैठा हुआ था। मंदिर में अजगर होने की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, सूचना के बाद पहुंचे स्नेक सेवर ने अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। बताया जा रहा है कि यह अजगर बीती रात से ही मंदिर परिसर में मौजूद था। आजकल चल रहे अत्यधिक गर्मियों के सीजन के कारण यह अजगर खुद को ठंडा रखने के लिए मंदिर में बने कमल के फूल की आकृति के साए (छांव) में आकर छिप गया था। सुबह जैसे ही लोगों की नजर इस पर पड़ी, तुरंत इसकी जानकारी स्नेक सेवर टीम और वन विभाग को दी गई। अत्यधिक सूझबूझ से किया गया रेस्क्यू, जंगल में छोड़ा सूचना मिलते ही प्रसिद्ध स्नेक सेवर माथुर धीमान अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने अत्यधिक सावधानी और अपने अनुभव का प्रदर्शन करते हुए करीब 9 फीट लंबे और भारी-भरकम अजगर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित काबू कर लिया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ग्राम पंचायत प्रधान राकेश कुमार, पूर्व प्रधान मदन लाल और वन मित्र कुमारी स्नेहा भी विशेष रूप से मौके पर मौजूद रहे। अजगर को पकड़ने के बाद सभी की मौजूदगी में उसे उसके प्राकृतिक आवास (घने जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया गया। सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद स्नेक सेवर माथुर धीमान ने स्थानीय लोगों से एक विशेष अपील की। स्नेक सेवर माथुर धीमान ने कहा कि “सांप पर्यावरण और प्रकृति के मित्र होते हैं। जब तक इन्हें छेड़ा या परेशान नहीं किया जाता, ये आमतौर पर इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसलिए कहीं भी सांप दिखने पर घबराने या उसे लाठी-डंडों से मारने के बजाय तुरंत वन विभाग या किसी प्रशिक्षित स्नेक सेवर को सूचित करें।”
जहरीला नहीं होता रॉक पाइथन वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘इंडियन रॉक पाइथन’ (अजगर) प्रजाति का जीव था, जो जहरीला नहीं होता है। हालांकि, अपने बड़े आकार के कारण यह लोगों में डर जरूर पैदा कर देता है। यह सांप अपने शिकार को कुंडली में जकड़कर और दम घोंटकर मारता है। मंदिर परिसर से इस अजगर का सुरक्षित निकाला जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिहाज से एक सराहनीय कदम है।

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