हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज और धर्मकोट में पोस्टर वॉर के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर खुलासा हुआ है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और प्रदेश खुफिया विभाग के पास इस क्षेत्र में रह रहे इजराइली और फिलिस्तीनी पर्यटकों का कोई सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं है। कांगड़ा के एसपी कुलभूषण वर्मा ने बताया कि पुलिस के पास केवल उन्हीं विदेशी पर्यटकों की जानकारी होती है, जो पर्यटन विभाग के पास रजिस्टर्ड होटलों या गेस्ट हाउस में रुकते हैं। नियमानुसार, किसी भी विदेशी को ठहराने पर ऑनलाइन सी-फॉर्म भरना अनिवार्य है। हॉस्टल और पीजी में रह रहे पर्यटकों का रिकॉर्ड नहीं हालांकि, धर्मकोट और आसपास के हॉस्टल, पीजी (PG) तथा स्थानीय घरों में रह रहे पर्यटकों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। इजराइली पर्यटकों के धर्मकोट आने और कुल्लू (कसोल) जाने की ट्रैकिंग का भी कोई पुख्ता सिस्टम नहीं है। सुरक्षा में इस ढील को देखते हुए एसपी कांगड़ा ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एसपी कुलभूषण वर्मा ने एयरपोर्ट अथॉरिटी, पर्यटन विभाग और सभी संबंधित एजेंसियों को आदेश दिए हैं कि कांगड़ा घाटी आने-जाने वाले हर एक विदेशी पर्यटक की पूरी जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई जाए। पिछले सप्ताह वायरल हुआ था वीडियो बता दें कि, यह घटनाक्रम पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद सामने आया। वीडियो में एक अज्ञात पर्यटक ने आरोप लगाया था कि गाजा और फिलिस्तीन में मानवाधिकार हनन करने वाले पूर्व इजराइली सैनिक अब इन शांत वादियों में आकर रह रहे हैं। एजेंसियों का मानना है कि इसी नैरेटिव के चलते दीवारों पर धमकियां लिखी गईं। इस घटनाक्रम के बाद धर्मकोट में डर का माहौल है। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, इजराइली पर्यटकों ने सुरक्षा कारणों से कमरों से बाहर निकलना और बाजार आना कम कर दिया है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है, लेकिन रात में स्प्रे पेंट करने वाले उपद्रवियों का सीसीटीवी फुटेज में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

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