भारत माता के वीर सपूत और परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई, 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे। उनकी शहादत दिवस पर सोमवार को उनके पिता जीएल बत्रा चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि विक्रम बत्रा एक असाधारण इंसान थे। उन्होंने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि ऐसा बेटा हमारे परिवार में जन्मा।” मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर के रहने वाले जीएल बत्रा ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। चेहरे पर अलग आभा थी बत्रा ने कहा, “बचपन से ही उनमें एक खास प्रतिभा थी। उनके चेहरे पर अलग ही आभा थी, आंखों में चमक थी, विचार बेहद मजबूत थे और उनके भीतर गजब का जुनून था। यही गुण उन्हें दूसरों से अलग बनाते थे। मुझे शुरू से ही एहसास था कि यह बच्चा जीवन में कुछ बड़ा करेगा।” जी.एल. बत्रा ने कहा कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा ऊंचे मुकाम पर पहुंचे और सफलता हासिल करे, लेकिन कोई यह कल्पना नहीं कर सकता कि ऐसा इस तरह होगा। उन्होंने कहा, “मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि ऐसा बेटा हमारे परिवार में जन्मा।” उन्होंने कहा कि शहीदों को याद रखना हर नागरिक का कर्तव्य और जिम्मेदारी है। “जो राष्ट्र अपने शहीदों को भूल जाता है, वह अपनी राह से भटक जाता है। मेरा मानना है कि समाज और सरकार को शहीदों की स्मृतियों को सहेजने और उन्हें जीवित रखने के लिए लगातार समर्पित प्रयास करते रहने चाहिए।” अग्निवीर योजना पर भी रखी राय अग्निवीर योजना पर जी.एल. बत्रा ने कहा कि यदि सरकार 25 प्रतिशत की बजाय 75 प्रतिशत अग्निवीरों को आगे भी सेना में सेवा का अवसर देने का फैसला करती है, तो यह स्वागतयोग्य कदम होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अग्निवीरों की अन्य मांगों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाई जाए और रिटायरमेंट के बाद रोजगार की समुचित व्यवस्था की जाए। उनके अनुसार, इससे योजना और अधिक प्रभावी तथा युवाओं के लिए लाभकारी बन सकेगी।