धर्मशाला के नरघोटा में 24 जून को हुए सड़क हादसे में 29 वर्षीय अक्षय कौरा की मृत्यु के बाद सोमवार को देवभूमि की सड़कों पर जन आक्रोश देखा गया। इस घटना में लोक निर्माण विभाग (PWD) की कथित लापरवाही के खिलाफ स्थानीय जनता और पीड़ित परिवार ने धर्मशाला में एक विशाल कैंडल मार्च निकाला। मार्च में शामिल सैकड़ों लोगों ने प्रशासन से अक्षय की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की। यह हादसा PWD की कथित गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, वह पिछले 10 महीनों से ‘डेथ ट्रैप’ बना हुआ था। हादसे के बाद PWD ने अब जाकर उस स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगाया है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ‘अंधा मोड़’ और 10 महीने पुराना भूस्खलन: सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल
इस हादसे का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसने लोक निर्माण विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अक्षय की कार पूरी तरह नियंत्रित गति में थी। सड़क के ठीक बीचों-बीच से अचानक भूस्खलन वाला हिस्सा शुरू होता है, जो एक खतरनाक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ (अंधा मोड़) बना हुआ था। किसी भी चालक के लिए समय रहते वाहन को नियंत्रित करना नामुमकिन था, जिसके कारण कार अनियंत्रित होकर 300 से 400 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।
मौत के बाद जागा विभाग, रातों-रात लगा दिए पत्थर और चेतावनी बोर्ड
भास्कर की पड़ताल में लोक निर्माण विभाग का एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाला चेहरा सामने आया है। गग्गल में तैनात पीडब्ल्यूडी (PWD) के उप-मंडल अधिकारी बलबित ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि यह भूस्खलन पिछले साल अगस्त (10 महीने पहले) से ही वहां मौजूद था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभाग 10 महीने तक किस कुंभकर्णी नींद में सोया था? जब 24 जून को अक्षय की जान चली गई, तो विभाग ने अपनी खाल बचाने के लिए हादसे के ठीक दो दिन बाद आनन-फानन में दुर्घटनास्थल पर पत्थर की बैरिकेडिंग कर दी और चेतावनी बोर्ड टांग दिए। पीड़ित परिवार की मांग:
दोषियों पर हो एफआईआर: 10 महीने तक भूस्खलन वाले ब्लाइंड स्पॉट को ठीक न करने वाले PWD के अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज हो।
मिले इंसाफ और शांति: पीड़ित मां ने रुआंसे गले से कहा, “मेरे बेटे की आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब हमारी तरह किसी और का घर न उजड़े। हमें सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए।”
धर्मशाला की जनता ने साफ कर दिया है कि जब तक इस खूनी लापरवाही के ज़िम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। घर का अकेला कमाने वाला था युवक मृतक अक्षय कौरा अपने परिवार का इकलौता बेटा और एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता बीमार रहते हैं। अक्षय शेयर मार्केट कोचिंग क्लासेस चलाता था और साइड बिजनेस के तौर पर परफ्यूम का काम भी करता था। परिजनों ने बताया कि वह हजारों छात्रों का भविष्य संवार रहा था और जीवन में बड़ी योजनाएं रखता था। कुछ दिन पहले ही खरीदा कार परिजनों के अनुसार, अक्षय ने हादसे से ठीक चार महीने पहले एक नई एमजी हेक्टर (MG Hector) गाड़ी खरीदी थी। वे बताते हैं कि वह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उसके सारे सपने एक पल में खत्म हो गए।