हिमाचल प्रदेश में दिसंबर 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होने लगी है। कांग्रेस ने ‘संगठन विस्तार अभियान’ की शुरुआत करते हुए बुधवार को भाजपा को बड़ा झटका देने का दावा किया। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के 2 बार के प्रत्याशी रहे बृजलाल अपने करीब 250 समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। शिमला स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित कार्यक्रम में PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। बृजलाल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और वह दो बार रामपुर विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं। इसके अलावा वह कैलाश फेडरेशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में उनका कांग्रेस में शामिल होना रामपुर की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। इस मौके पर विनय कुमार ने संगठन विस्तार अभियान की औपचारिक शुरुआत का ऐलान करते हुए दावा किया कि आने वाले दिनों में भाजपा के 8 हजार से 10 हजार कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में आने के लिए लगातार फोन आ रहे हैं। 2027 के चुनाव के लिए अभी से संगठन मजबूत कर रहे: विक्रमादित्य विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अभी से संगठन को मजबूत करने में जुट गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार करना है। विक्रमादित्य ने दावा किया कि फिलहाल रामपुर क्षेत्र के नेता कांग्रेस से जुड़े हैं, लेकिन आने वाले समय में प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी भाजपा के कई बड़े चेहरे कांग्रेस में शामिल होंगे। भाजपा पर साधा निशाना कांग्रेस में शामिल होने के बाद बृजलाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह बिना किसी शर्त के कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उनका आरोप था कि भाजपा अब केवल कुछ नेताओं की पार्टी बनकर रह गई है और पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद की दौड़ को लेकर कई नेता आपसी रस्साकशी में लगे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रामपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, लेकिन भाजपा ने स्थानीय नेतृत्व को नजरअंदाज कर किन्नौर से उम्मीदवार लाकर टिकट दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी। हालांकि, भाजपा की ओर से इन दावों और आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन विस्तार की शुरुआत मान रही है, जबकि आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस राजनीतिक संदेश का किस तरह जवाब देती है।

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