ये कहानी जून के पहले हफ्ते में शुरू हुई लेकिन इसकी एक पृष्ठभूमि है। सबसे पहले वो कमरा, जहां दानपात्र खोले जाते थे, उनमें भरे नोट मेज पर उलटे जाते थे। इस कमरे में 4 मेजें लगी हुई थी। एक main table है जहां गिनती होती थी। इस टेबल के चारों तरफ कुर्सियां लगी हैं जिस पर बैठकर नोट गिनकर बंडल बनाए जाते थे। 

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