हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसूता रजनी शर्मा उर्फ मंजू की चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत मामले में डॉक्टर के बाद अब दो स्टाफ नर्सों पर कार्रवाई की तैयारी है। जनआंदोलन के बाद अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) ने हैल्थ डायरेक्टर को पत्र लिखकर स्टाफ नर्सों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग डॉ. अनु देवी को बीते कल ही सस्पेंड कर चुकी हैं। सस्पेंशन के बाद डॉ. अनु का मुख्यालय शिमला में फिक्स किया गया है। गुस्साएं लोगों की मांग पर अब प्रसूता रजनी शर्मा की मौत के दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्स रेशमा और सोनिया पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। सूत्रों के अनुसार- सरकार आज दोनों स्टाफ नर्सों पर भी कार्रवाई कर सकती है। इन दोनों पर भी मृतक महिला के परिजनों ने दुर्व्यवहार और समय पर उपचार नहीं देने के आरोप लगाए है। उपचार में देरी की वजह से ही मंजू की जान चली गई। इसी वजह से प्रदर्शनकारियों ने भी दोनों स्टाफ नर्सों के खिलाफ सख्ता विभागीय कार्रवाई की मांग की है। विधायक सुंदर ठाकुर ने भी कार्रवाई का भरोसा दिया स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने भी प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि दोनों नर्सों के संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। यह कार्रवाई लगातार बढ़ते जनदबाव, उग्र प्रदर्शनों और आमरण अनशन के बाद की जा रही है। क्या है पूरा मामला इस पूरे मामले की शुरुआत 21 जून को हुई, जब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में प्रसूता रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों और आंदोलनकारियों का आरोप है कि जब रजनी गंभीर हालत में थीं, तब डॉ. अनु देवी ने उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया और समय पर उचित उपचार उपलब्ध नहीं कराया। इसी दौरान दो स्टाफ नर्स पर भी लापरवाही बरतने के आरोप लगे। पहले अपस्ताल प्रबंधन ने भी ढुलमुल रवैया अपनाते हुए मामले को दबा दिया था। मगर बीते सोमवार और मंगलवार को मंडी और कुल्लू जिला के लोगों ने अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और डॉ. अनु को सस्पेंड कर दिया गया है।