धर्मशाला नगर निगम में 1 जुलाई को होने वाले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शहर में अतिक्रमण का मुद्दा इस समय सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुका है। भाजपा के तीन पार्षदों के खिलाफ अतिक्रमण की रिपोर्ट डीसी कांगड़ा द्वारा सरकार को भेजे जाने के बाद, अब भाजपा ने भी कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तगड़ा पलटवार किया है। भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार, प्रधानमंत्री और राज्यपाल तक पहुंची शिकायत मंगलवार को भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस के तीन पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी के खिलाफ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की लिखित शिकायत दर्ज करा दी। यह शिकायत डीसी कांगड़ा एवं निर्वाचन अधिकारी हेमराज बैरवा के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और शहरी विकास विभाग के सचिव को भेजी गई है। दोनों ही दलों के नेताओं पर अवैध निर्माण के गंभीर आरोप हैं और यदि जांच में ये सही पाए जाते हैं, तो कई पार्षदों की कुर्सी (सदस्यता) खतरे में पड़ सकती है। इन कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत वार्ड नंबर 4: पार्षद एवं पूर्व मेयर नीनू शर्मा (शिकायतकर्ता: नेहा सांगल) वार्ड नंबर 11: पार्षद अनुराग धीमान (शिकायतकर्ता: अक्षय धीमान) वार्ड नंबर 14: पार्षद आनोज बिष्ट वार्ड नंबर 17: पूर्व प्रत्याशी सुरेश पप्पी (शिकायतकर्ता: चूरू राम) इसके अलावा, वार्ड नंबर 15 (खनियारा) से पूर्व मेयर रजनी व्यास और वार्ड नंबर 2 से ओंकार सिंह नैहरिया के खिलाफ भी भाजपा कानूनी सलाह ले रही है ताकि उनके खिलाफ भी शिकंजा कसा जा सके।
आंकड़े भाजपा के पक्ष में, लेकिन प्रतिष्ठा की जंग बनी बड़ी नगर निगम धर्मशाला के समीकरणों पर नजर डालें तो यहाँ कुल 17 वार्ड हैं। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में भाजपा ने 11 सीटों पर बंपर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि कांग्रेस के खाते में 5 और एक सीट निर्दलीय के पास गई है। बहुमत के हिसाब से भाजपा समर्थित मेयर और डिप्टी मेयर की जीत तय मानी जा रही है। सुधीर शर्मा के गृह क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल भले ही गणित भाजपा के पक्ष में हो, लेकिन चुनाव से ठीक पहले दिल्ली से लेकर शिमला तक पहुंची इन भारी-भरकम शिकायतों ने धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के गृह क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मी को पूरी तरह से बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि 1 जुलाई को होने वाले चुनाव में इस ‘अतिक्रमण वार’ का क्या असर देखने को मिलता है।