हिमाचल हाईकोर्ट ने पोंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में जमीन आवंटन से जुड़े मामले में श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर को तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें 22 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला अजीत सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य से जुड़ा है। इसके साथ एक अन्य याचिका भी जुड़ी हुई है। इन मामलों में याचिकाकर्ता अजीत सिंह हैं। वह पोंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में जमीन आवंटन से जुड़े अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे हैं। हाईकोर्ट में सुनवाई में राजस्थान के अधिकारियों की ओर से अदालत के 15 मई 2025 के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। अधिकारियों ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं को पहले ही जमीन दी जा चुकी है। राजस्थान के अधिकारियों ने अपनी व्यक्तिगत पेशी से छूट देने की भी मांग की थी। हाईकोर्ट ने दोनों मांगों को खारिज कर दिया। राजस्थान के अधिकारियों का रुख जमीन नहीं देने वाला: कोर्ट कोर्ट ने कहा कि राजस्थान के अधिकारियों का लगातार रुख यह रहा है कि पोंग बांध विस्थापितों को पहले चरण में दी जाने वाली जमीन का आवंटन नहीं किया जाए। यह जमीन राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में दी जानी थी। मगर अधिकारियों ने श्रीगंगानगर के बजाय विस्थापितों को श्रीगंगानगर से करीब 600 किलोमीटर दूर जैसलमेर में जमीन आवंटित की। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी अब विस्थापित परिवारों की तीसरी पीढ़ी अपने हकों की लड़ाई लड़ रही है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 15 मई 2025 के अपने आदेश में बदलाव की मांग करने वाली राजस्थान अधिकारियों की अर्जियां खारिज कर दीं। अब मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। इस दिन प्रतिवादी श्रीगंगानगर राजस्थान के जिला कलेक्टर को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। मामला क्या है? पोंग बांध निर्माण के बाद हिमाचल प्रदेश के सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए थे। पुनर्वास योजना के तहत उन्हें राजस्थान में कृषि भूमि देने की व्यवस्था की गई थी। मगर कई दशक बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में परिवारों को आज तक जमीन नहीं मिल सकी। विस्थापितों का दावा है कि उन्हें जो जमीन पहले चरण में श्रीगंगानगर में मिलनी थी, वह नहीं दी गई और उन्हें दूर जैसलमेर में जमीन दे दी गई। कोर्ट ने माना कि यह विवाद अभी कायम है, इसलिए राजस्थान की ओर से आदेश बदलने की मांग स्वीकार नहीं की गई। बता दें कि हिमाचल में निर्मित पोंग बांध से बिजली निर्मित हो रही है। इससे उत्तर भारत के सैकड़ों गांव को बिजली मिल रही है। इसी तरह, पंजाब, हरियाणा समेत राजस्थान में सैकड़ों गांव को इसका पानी नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए मिल रहा है।