हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए इस वित्त वर्ष में अब तक 212 करोड़ रुपए जारी किए हैं। सरकार के अनुसार, इसमें 131.03 करोड़ रुपए पेंशनरों और 80.97 करोड़ रुपए सरकारी कर्मचारियों के मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए जारी किए गए हैं। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों पर फाइनेंस डिपार्टमेंट ने ने लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के जल्द भुगतान के लिए यह राशि जारी की है। कर्मचारी और पेंशनर अपने भुगतान की जानकारी संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) से प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने दावा किया है कि वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के चलते कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों का चरणबद्ध तरीके से निपटारा किया जा रहा है। 25 हजार से कम पेंशनधारकों का लंबित एरियर जारी सरकार ने वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए या दिवंगत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को भी राहत देने की बात कही है। जिन कर्मचारियों की मूल पेंशन 25 हजार रुपए प्रतिमाह और पारिवारिक पेंशन 15 हजार रुपए प्रतिमाह तक है, उनके लंबित एरियर जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2016 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों के संशोधित पेंशन एरियर का भी पूरा भुगतान करने का दावा किया गया है। सीएम बोले- पूर्व सरकार ने 60 हजार करोड़ मिलने के बावजूद एरियर नहीं दिया मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को केंद्र से आरडीजी और जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में करीब 60 हजार करोड़ रुपए की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिली थी, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनरों के छठे वेतन आयोग के एरियर सहित अन्य वित्तीय लाभों का समय पर भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का निर्णय लिया और अब प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ कर्मचारियों व पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का ‘व्यवस्था परिवर्तन’ केवल आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता का विश्वास मजबूत करना भी इसका उद्देश्य है।

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