मंडी जिले के नेरचौक क्षेत्र में पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) परियोजना का कार्य तेजी से जारी है। गैस नेट कंपनी द्वारा संचालित इस परियोजना के तहत बाजार क्षेत्र में सड़कों के दोनों ओर पाइपलाइन बिछाने के लिए खुदाई का काम जोरों पर है। कंपनी के निरीक्षण अभियंता ईशान गुलेरिया ने जानकारी दी कि गैस नेट कंपनी का लक्ष्य दीपावली तक नेरचौक के निवासियों को पीएनजी सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि गैस भंडारण के लिए 2 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें से एक रत्ती में और दूसरा लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज, नेरचौक में होगा। परियोजना शुरू करने से पहले लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद से आवश्यक अनुमतियां ली गई हैं और निर्धारित शुल्क भी जमा करवाया गया है। कई राज्यों में चल रहे कंपनी के प्रोजेक्ट ईशान गुलेरिया के अनुसार, गैस नेट कंपनी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और किन्नौर सहित राजस्थान के चूरू व बीकानेर तथा उत्तराखंड में भी अपनी सेवाएं दे रही है। नेरचौक की चामुंडा कॉलोनी में अब तक 16 घरों और भंगरोटू क्षेत्र में सात घरों को पीएनजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। कंपनी ने इस क्षेत्र में लगभग 2500 घरों को कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों तक पहुंचेगी गैस पाइप नेचुरल गैस (पीएनजी) प्राकृतिक गैस का एक रूप है, जिसे पाइपलाइन के माध्यम से सीधे घरों तक पहुंचाया जाता है। इसका मुख्य उपयोग रसोई गैस के रूप में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है, जबकि प्राकृतिक गैस का उत्पादन देश में भी होता है। ऐसे में पीएनजी का विस्तार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक होगा। मनाली, पनारसा में सीएनजी स्टेशन स्थापित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सीएनजी और पीएनजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। मनाली, पनारसा और अन्य स्थानों पर सीएनजी स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। बल्ह क्षेत्र के बहना में भी जल्द ही एक सीएनजी स्टेशन शुरू होने की संभावना है। ऊना में हजारों घरेलू पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं, और बद्दी औद्योगिक क्षेत्र में भी पीएनजी सुविधा उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को मिलेगी सुविधा पीएनजी सुविधा शुरू होने से उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता और बुकिंग संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

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