मंडी के ऐतिहासिक सेरी मंच पर बुधवार को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान महाराणा प्रताप के आदर्शों को पाठ्यक्रम में शामिल करने, सवर्ण आयोग के गठन और जरूरतमंदों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। कार्यक्रम का आयोजन श्री राजपूत सभा मंडी और राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष केएस जम्वाल ने कहा कि देश की आजादी और सनातन संस्कृति की रक्षा में महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई सहित अनेक वीर योद्धाओं का अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने सरकारों से इन महापुरुषों के योगदान को उचित सम्मान देने का आग्रह किया। वंचित लोगों को मिले आरक्षण का लाभ : जम्वाल जम्वाल ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए, चाहे वे किसी भी वर्ग से हों। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य वर्ग संयुक्त मोर्चा यूजीसी से जुड़े प्रावधानों का विरोध कर रहा है और इस संबंध में लगातार अपनी आवाज उठा रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के नेशनल को-ऑर्डिनेटर वचन सिंह राणा मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में राजपूत सभा की विभिन्न इकाइयों के समाजहित में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए महाराणा प्रताप का चरित्र : राणा राणा ने सवर्ण आयोग के गठन की मांग दोहराते हुए कहा कि नई पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के लिए महाराणा प्रताप के जीवन और चरित्र को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने महाराणा प्रताप के जीवन, त्याग, शौर्य और राष्ट्रभक्ति पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।

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