हिमाचल प्रदेश और पंजाब को आपस में जोड़ने वाली ऐतिहासिक पठानकोट-जोगिंदर नगर रेल लाइन की कायाकल्प करने का काम तेज हो गया है। उत्तर रेलवे ने इस लगभग 200 किलोमीटर लंबे पहाड़ी रेल ट्रैक को नैरो गेज (छोटी लाइन) से ब्रॉड गेज (बड़ी लाइन) में बदलने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। रेल मंत्रालय से फाइनल लोकेशन सर्वे को हरी झंडी मिलने के बाद, चंडीगढ़ स्थित उप-मुख्य अभियंता निर्माण-द्वितीय कार्यालय इस मेगा प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने में जुट गया है। परियोजना की आर्थिक और वित्तीय आकलन के लिए ट्रैफिक स्टडी सर्वे शुरू किया जा रहा है। परियोजना क्षेत्र के भीतर आने वाले सभी परिवहन और व्यावसायिक केंद्रों से पिछले 1 से 5 साल तक के आंकड़े जुटाए जाएंगे। भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा सर्वे क्षेत्र में भविष्य की यात्री संख्या और माल ढुलाई क्षमता को देखते हुए भविष्य को देखते हुए इसका आकलन किया जा रहा है। ताकि बड़ी लाइन बनने के बाद क्षेत्र के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को अधिकतम गति मिल सके। उत्तर रेलवे ने इस बेहद तकनीकी और विस्तृत सर्वे की कमान मेसर्स एल. एन. मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी है। रेलवे के आधिकारिक आदेश के अनुसार, ऋतिक राज, अमित कुमार, श्रीकांत सिंह रावत और आशुतोष कुमार की एक विशेष टीम को फील्ड में तैनात किया गया है। रेलवे ने स्थानीय प्रशासन, निकायों और उद्योगपतियों से प्रामाणिक डेटा साझा करने की अपील की है।
इन 7 बड़े औद्योगिक केंद्रों पर टिकी नजरें इस रेल कॉरिडोर के ब्रॉड गेज होने से सबसे बड़ा फायदा स्थानीय उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। रेलवे की सर्वे टीम क्षेत्र के बड़े गोदामों और इंडस्ट्रियल पार्कों का दौरा कर उनके वर्तमान व भविष्य के उत्पादन और माल ढुलाई के तरीकों की जानकारी लेगी। इसके लिए विशेष रूप से 7 बड़े केंद्रों को चिन्हित किया गया है। इन 6 मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा सर्वे भविष्य के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी परियोजना उत्तर रेलवे का मानना है कि इस सर्वे से प्राप्त होने वाले आंकड़े भविष्य की जरूरतों के मुताबिक मजबूत रेल बुनियादी ढांचा तैयार करने में गेम-चेंजर साबित होंगे। रेलवे ने इस संबंध में मारंडा (पालमपुर) के सहायक मंडल अभियंता और संबंधित कंसलटेंट को तत्काल आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके पूरे होने से पंजाब और हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के एक नए युग की शुरुआत होगी।