हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एडवोकेट भड़क उठे हैं। शिमला के सील्ड रोड पर परमिट फीस बढ़ाने और पुलिस की सख्ती के विरोध में वकील सड़कों पर उतर आए हैं। राज्य सचिवालय के बाहर कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। आक्रोशित एडवोकेट, ‘वीआईपी कल्चर नहीं चलेगा’, ‘अंग्रेजो के कानून नहीं चलेंगे’, जैसे नारे सुक्खू सरकार के खिलाफ लगा रहे हैं। मौके पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इससे पहले शिमला के एडवोकेट अपनी नाराजगी जाहिर करने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ पहुंचे थे। मगर वहां सीएम सुक्खू ने वकीलों से मुलाकात नहीं की। शिमला की लाइफ लाइन सर्कुल रोड बंद इससे नाराज वकीलों ने सचिवालय तक रैली निकाली। अब सचिवालय के बाहर सड़क पर धरने पर बैठ गए। इससे शिमला की लाइफ लाइन कहे जाने वाला सर्कुलर रोड वाहनों के लिए पूरी तरह बंद हो गया है। सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी लाइनें लग गई है। ट्रैफिक रोके जाने से सैकड़ों लोग और स्कूली बच्चे परेशान सैकड़ों लोग ट्रैफिक जाम में फंसे हुए हैं। लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहर 12 बजे के बाद स्कूली बच्चों को छुट्टी हो जाती है। इसलिए, छोटे-छोटे बच्चे भी ट्रैफिक जाम में फंस गए है। मगर एडवोकेट मुख्यमंत्री से बात किए बगैर धरना खत्म करने को तैयार नहीं है। सुक्खू सरकार ने कई गुणा बढ़ाई सील्ड रोड परमिट की फीस बता दें कि हिमाचल सरकार ने बजट सेशन में ही शिमला की सील्ड रोड पर वाहनों की परमिट फीस कई गुणा बढ़ाई है। सील्ड रोड का शुल्क पहले 2500 रुपए था, जिसे 10 हजार रुपए किया गया। इसी तरह, रोजाना 200 रुपए का परमिट मिलता था, इसका शुक्ल 1000 रुपए, प्रोसेसिंग फीस 100 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए की गई। बिना परमिट यदि कोई गाड़ी पकड़ी गई तो उसके 10 हजार रुपए का चालान का प्रावधान किया गया है। शिमला में हिमाचल हाईकोर्ट भवन सील्ड रोड से कनेक्ट है। इसलिए, शिमला के वकील परमिट फीस बढ़ाने और पुलिस की सख्ती से नाराज है। एडवोकेट मांग कर रहे हैं कि जैसी व्यवस्था पहले से चली आ रही है, वकीकों को वैसे ही अनुमति दी जाए।

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