हिमाचल प्रदेश में जनगणना की तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य में जनगणना कब और कैसे होगी, इसकी जानकारी डायरेक्टर ऑफ सेंसेस दीप शिखा शर्मा आज (शुक्रवार) शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देंगी। शिमला में एक जून से जनगणना के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 10 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जनगणना कर्मियों को डिजिटल उपकरणों और डेटा संग्रहण प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में उन्हें मोबाइल ऐप, ऑनलाइन एंट्री और जानकारी सत्यापन से जुड़े तकनीकी पहलुओं से भी अवगत कराया जाएगा। जनगणना कर्मचारी 16 जून से 15 जुलाई तक घर-घर जाकर सूचनाएं एकत्र करेंगे। राज्य में जनगणना का कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। एक जून से खुलेगा ऑनलाइन पोर्टल एक जून से ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू हो जाएगा। इस पोर्टल पर लोग स्वयं ऑनलाइन माध्यम से जनगणना फॉर्म भर सकेंगे। इसके लिए नागरिकों को सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल सीडीसीसेंसस.गवर्नमेंट.इन पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद उन्हें अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज करनी होगी। राज्य में यह सुविधा 1 जून से 15 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगी। स्व-गणना के बाद 11 अंक का आईडी नंबर मिलेगा स्व-गणना के बाद नागरिकों को 11 अंकों का स्व-गणना आईडी नंबर मिलेगा। 16 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 के बीच जब जनगणना कर्मी (प्रगणक) घर-घर सर्वेक्षण करेंगे, तब नागरिकों को यह आईडी नंबर बताना होगा। ऐसा करने पर स्व-गणना के दौरान पोर्टल पर दर्ज जानकारी स्वतः प्रगणक के मोबाइल ऐप में दिखाई दे जाएगी। यह प्रक्रिया नागरिकों और प्रगणकों दोनों के लिए सहायक सिद्ध होगी। मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज होगा डाटा इस बार फील्ड में तैनात प्रगणक कागजी फॉर्म की जगह अत्याधुनिक एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इस ऐप के जरिए वास्तविक समय में डेटा दर्ज होगा, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा प्रोसेसिंग की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। जनगणना की पूरी प्रक्रिया की निगरानी और प्रबंधन के लिए विशेष पोर्टल तैयार किया गया है। यह पोर्टल अधिकारियों को लॉजिस्टिक्स, प्रोग्रेस ट्रैकिंग, प्रशिक्षण और संसाधनों के उचित आवंटन में मदद करेगा। पहले चरण में घरों की जानकारी जुटाई जाएगी पहले चरण में घरों की गणना की जाएगी। इस दौरान लोगों के घरों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसके लिए कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। खास बात यह है कि घरों की दीवारों और छतों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इसके अलावा पानी और अनाज के स्रोतों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। दूसरा चरण फरवरी में शुरू होगा, जिसमें लोगों की गणना की जाएगी। डिजिटल तकनीक से होगा जनगणना कार्य प्रदेश में इस बार जनगणना का काम पूरी तरह डिजिटल तकनीक से किया जाएगा। इसमें आम लोगों को स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने और अपनी गणना करने का अवसर भी मिलेगा। पारंपरिक कागजी प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए इस बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराई जाएगी। इस अभियान को गति देने और प्रत्येक नागरिक की सटीक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार मुख्य रूप से तीन डिजिटल स्तंभों का उपयोग कर रही है।