पंजाब-चंडीगढ़ समेत देश के मैदानी इलाकों में समर वेकेशन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में टूरिस्ट उमड़ पड़े हैं। इससे हिल स्टेशनों पर टूरिस्टों की भीड़ बढ़ी है। खासकर मनाली, रोहतांग पास, अटल टनल, शिमला, डलहौजी और कसौली टूरिस्ट्स से अटे पड़े हैं। होटलों में बुधवार को 60 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी हो गई। वीकेंड पर 90 फीसदी ऑक्यूपेंसी होने के आसार है। मुंबई से आईं इशिका ने बताया कि वह पहली बार मनाली आईं है। यहां का मौसम बहुत अच्छा है। मुंबई में 45-46 डिग्री तापमान रहता है। अच्छा लग रहा है और यहां इंजॉय कर रहे हैं। उन्होंने यहां का स्ट्रीट फूड भी इंजॉय किया। हैदराबाद की महिला टूरिस्ट ने बताया कि वह भी पहली बार मनाली आई है। मनाली का उनका अच्छा एक्सपीरियंस रहा है। उन्होंने मनाली को इंजॉय करने के लिए सबसे बेहतर प्लेस बताया। हिल स्टेशन पर उमड़ी भीड़ के बाद टूरिस्टों को ट्रैफिक जाम का भी सामना करना पड़ रहा है। अगले कुछ दिन हिमाचल के 10 फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर कैसा रहेगा होटल्स का हाल, कहां मिलेगी पार्किंग की सुविधा और कैसे जाम से बचकर हिल स्टेशन के सफर को आसान बनाए, पढ़िए दैनिक भास्कर की रिपोर्ट… 1. शिमला:
वीकेंड पर ऑक्यूपेंसी 90% की उम्मीद: हिल स्टेशन में शिमला टूरिस्ट का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल है। शिमला के होटेलियर अश्वनी सूद ने बताया कि बुधवार को लगभग 60% तक ऑक्यूपेंसी हो गई है। वीकेंड के लिए एडवांस में ही 70% तक कमरों की बुकिंग हो चुकी है और शनिवार-रविवार को 90% से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। शिमला के होटलों में 1800 रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक के कमरे मिल जाते हैं। लेट-नाइट पहुंचने वाले टूरिस्ट को एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है। कैसे पहुंचे और ट्रैफिक का हाल: कालका-शिमला NH-05 से टूरिस्ट शिमला पहुंच सकते हैं। कालका से शिमला की दूरी लगभग 86 किलोमीटर है। निजी वाहन से कालका से शिमला के लिए ढाई से तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। मगर, शिमला में बीच-बीच में ट्रैफिक जाम टूरिस्ट को परेशान कर सकता है। इसलिए शिमला आने वाले टूरिस्ट को सलाह दी जाती है कि जब आप शिमला से किसी दूसरी लोकेशन पर निकलें तो एक घंटे पहले निकलें। वीकेंड पर ट्रैफिक जाम ज्यादा परेशान कर सकता है। कच्ची घाटी से विक्ट्री टनल, हिमलैंड से लिफ्ट, विक्ट्री टनल से लक्कड़ बाजार, ढली टनल से ढली चौक के बीच ज्यादा ट्रैफिक जाम लग रहा है। पार्किंग: शिमला शहर में पार्किंग बड़ी समस्या है। यहां ज्यादातर होटल में पार्किंग नहीं है। इसलिए टूरिस्ट को कई बार सड़क किनारे ही गाड़ियां पार्क करनी पड़ती हैं। शिमला में लिफ्ट के पास दो बड़ी पार्किंग हैं। यहां पर 3500 से ज्यादा गाड़ियां पार्क करने की सुविधा है। 2. रोहतांग दर्रा, बारालाचा और शिंकुला
जिन्होंने बर्फ देखनी है, उनके लिए रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रा सबसे बड़ी टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। यहां अभी चार से छह फीट तक बर्फ देखी जा सकती है। मनाली पहुंचने वाले अधिकतर टूरिस्ट रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रा जाना नहीं भूलते। रोहतांग दर्रा से ज्यादा टूरिस्ट वापस मनाली लौटते हैं, क्योंकि यहां होटल की सुविधा नहीं है। कुछ टूरिस्ट लाहौल स्पीति जिले के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों में बने होम स्टे में भी जाते हैं। ट्रैफिक का हाल: मनाली से रोहतांग दर्रा की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है। यहां पहुंचने में दो से ढाई घंटे का वक्त लग जाता है। वीकेंड पर यहां बीच-बीच में ट्रैफिक जाम भी लग जाता है। अर्ली मॉर्निंग यात्रा कर ट्रैफिक जाम से बचा जा सकता है। पार्किंग: रोहतांग दर्रा और बारालाचा में पार्किंग सुविधा नहीं है। इसलिए टूरिस्ट सड़क किनारे गाड़ी खड़ी करते हैं। इसी वजह से ट्रैफिक जाम भी लग जाता है। 3. नारकंडा
होम स्टे की सुविधा उपलब्ध: नारकंडा शिमला से लगभग 62 किलोमीटर दूर है। यह देवदार के जंगलों के बीच बसा छोटा कस्बा है। यहां भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने होम स्टे बना लिए हैं, जो कि 1500 रुपए से लेकर 8000 रुपए रोजाना के हिसाब से किराए पर उपलब्ध रहते हैं। नारकंडा में टूरिस्ट देवदार के जंगलों का आनंद उठाते हैं और हाटू की तरफ और नारकंडा के जंगल में ट्रैकिंग पर निकलते हैं। ट्रैफिक का हाल: नारकंडा के लिए भी कालका-शिमला-रामपुर NH से पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ़ से नारकंडा पहुंचने में करीब साढ़े पांच घंटे का वक्त लगता है। नारकंडा जाने वाले टूरिस्ट को शिमला के ट्रैफिक जाम से बचने के लिए शोघी-आनंदपुर साहिब, भट्टाकुफर-ढली सड़क का इस्तेमाल करना चाहिए। पार्किंग: नारकंडा के ज्यादातर होटलों में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। 4. मनाली
सबसे अधिक टूरिस्ट मनाली पहुंच रहा है। इसकी वजह पास में रोहतांग, बारालाचा और शिंकुला दर्रा है, क्योंकि ज्यादातर टूरिस्ट बर्फ देखने की चाहत में आ रहा है। ऐसे टूरिस्ट शाम को मनाली रुकते हैं और सुबह बर्फ देखने रोहतांग दर्रा की तरफ चले जाते है। दिनभर बर्फ में मस्ती करने के बाद शाम को वापस मनाली लौटते हैं। बुधवार शाम को मनाली में 65 फीसदी से अधिक ऑक्यूपेंसी रही। इस वीकेंड पर 95 से 100 फीसदी ऑक्यूपेंसी होने के आसार है। कुल्लू में ब्यास नदी में रिवर राफ्टिंग का मजा भी उठा सकते हैं। ट्रैफिक जाम परेशान कर रहा:
पर्यटन सीजन में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम भी मनाली में लग रहा है। हालांकि 2 दिन पहले ही स्थानीय प्रशासन ने 30 पुलिस जवानों की तैनाती पर्यटन सीजन को देखते हुए की है। इसके बाद थोड़ी राहत मिली है। हालांकि शाम के वक्त पलचान के आसपास हल्का जाम लग रहा है। इसी तरह चंडीगड़ से जब मनाली पहुंचते हैं तो उस दौरान भी हल्का जाम लग रहा है। मनाली पुलिस का दावा है कि ट्रैफिक जवानों की तैनाती के बाद अब ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलेगा। चंडीगढ़ से मनाली लगभग 300 किलोमीटर दूर है और यहां पहुंचने में लगभग 6 घंटे लग जाते हैं। पार्किंग: मनाली फायर स्टेशन के पास लगभग 800 वाहन, भूतनाथ मंदिर के पास 500 वाहन, मिशन अस्पताल के साथ 300 वाहनों की पार्किंग के अलावा भी शहर में नगर परिषद ने छोटी-छोटी पार्किंग बना रखी हैं। इसी तरह, मनाली के ज्यादातर होटलों ने भी अपनी पार्किंग बना रखी है। लिहाजा यहां पार्किंग की ज्यादा समस्या नहीं है। 5. कुफरी
होटल कम, बुकिंग के बाद ही रुकें: कुफरी शिमला से लगभग 15KM दूर है। कुफरी के आसपास महासू पीक, ग्रीन वेली, देशू, आदि पर्यटन स्थलों पर जाकर टूरिस्ट मस्ती करते हैं। महासू पीक से टूरिस्ट दूरबीन से सामने हिमालय रेंज, चूड़धार आदि देख सकते हैं और यहां पर घुड़सवारी का आनंद उठाते हैं। कुफरी में होटल कम संख्या में है। मगर, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे काफी संख्या में बन गए हैं। इससे टूरिस्ट ग्रामीण क्षेत्रों के होम स्टे में पहुंचकर न केवल ग्रामीण माहौल देखते हैं, बल्कि खाने में भी देसी व्यंजन सिड्डू का आनंद लेते हैं। ट्रैफिक का हाल: कुफरी के लिए NH-5 कालका-शिमला-रामपुर से पहुंचा जा सकता है। चंडीगढ़ से कुफरी पहुंचने में करीब 4 घंटे लगते हैं। कुफरी आने वाले टूरिस्ट को शिमला में ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। इससे बचने के लिए टूरिस्ट शोघी-आनंदपुर साहिब, भट्टाकुफर-ढली सड़क का इस्तेमाल कर सकते हैं। पार्किंग: पर्यटन सीजन जब पीक पर होता है तो कुफरी में रोजाना 2500 से भी ज्यादा वाहन आसपास के क्षेत्रों से पहुंचते हैं। यहां पार्किंग की गंभीर समस्या है। सरकार ने एक भी गाड़ी की पार्किंग नहीं बनाई। इसलिए टूरिस्ट एनएच किनारे वाहन पार्क करते हैं। 6. कसोल
होटल्स में 70 प्रतिशत तक ऑक्यूपेंसी: कसोल कुल्लू जिले की मणिकर्ण घाटी में पड़ता है। प्रकृति और हरे भरे जंगल देखने की चाहत में टूरिस्ट कसोल पहुंचते हैं। यहां पर लोकल से ज्यादा इजराइल के टूरिस्ट मौज-मस्ती करते दिखते हैं। कसोल के होटलों में बुधवार को 70 प्रतिशत तक ऑक्यूपेंसी हो गई है। परसों शाम तक 90 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी होने की उम्मीद है। ट्रैफिक का हाल: मनाली से कसोल की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। इसमें लगभग 3 घंटे का वक्त लग जाता है। कसोल पहुंचने के लिए पहले मणिकर्ण पहुंचना पड़ता है। टूरिस्ट चंडीगढ़-मनाली फोरलेन से पहले भुंतर तक आ सकते हैं। यहां से मणिकर्ण होते हुए कसोल पहुंचा जा सकता है। कसोल जाते वक्त मणिकर्ण में वीकेंड पर हल्का ट्रैफिक जाम लगता है। आम दिनों में जाम की समस्या नहीं रहती। पार्किंग: कसोल के अधिकांश होटलों में पार्किंग की सुविधा है। मगर यहां भी बाजार में पार्किंग में दिक्कत रहती है। 7. जीभी-तीर्थन वैली
होटल की पर्याप्त सुविधा नहीं: समर सीजन में कुल्लू जिले की जीभी और तीर्थन वैली सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। यहां पर टूरिस्ट पहलगाम की तरह दिखने वाले शांघड़ जाना नहीं भूलते। शोझा, तीर्थन वेली, जलोड़ी जोत और घ्यागी में प्रकृति की सुंदरता का आनंद उठाते हैं। ​​​​​इन जगह पर होटल और सरकारी गेस्ट हाउस की सुविधा है। मगर, इनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। इसलिए ज्यादातर टूरिस्ट कुल्लू, मनाली और बंजार से सुबह इन जगहों के लिए निकलते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। ट्रैफिक का हाल: जीभी पहुंचने के लिए टूरिस्ट को चंडीगढ़-मनाली फोरलेन से आना होगा। मंडी के ओट से जीभी के लिए लिंक रोड़ कटता है। ओट से जीभी की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। इस सफर में डेढ़ घंटा लग जाता है। यहीं से टूरिस्ट आसपास के पर्यटन स्थलों की तरफ मूव करते हैं। सिंगल लेन सड़क की वजह से बीच-बीच में हल्का ट्रैफिक जाम भी यहां परेशान करता है। पार्किंग- जीभी-तीर्थन वैली में पार्किंग एक बड़ी समस्या है। इस वजह से टूरिस्ट सड़क किनारे जहां भी जगह मिलती है, वहां गाड़ी पार्क कर देते हैं। 8. कसौली सेटर-डे और संडे को होटल पूरी तरह पैक : सोलन जिला का सबसे मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन कसौली है। यह चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब से सटा क्षेत्र है। इस वजह से यहां ज्यादातर वक्त टूरिस्ट की भीड़ रहती है। कसौली में बुधवार को ही 75 फीसदी तक ऑक्यूपेंसी हो गई। शनिवार और रविवार को 95 से 100 फीसदी होने के आसार है। ट्रैफिक का हाल और कैसे पहुंचे: चंडीगढ़-शिमला फोरलेन से टूरिस्ट को पहले धर्मपुर तक आना होता है। धर्मपुर से करीब 12 किलोमीटर गड़खल रोड पर कसौली पड़ता है। मगर यहां, इस बार टूरिस्ट को ट्रैफिक जाम रोजाना परेशान कर रहा है। गड़खल के साथ दो किलोमीटर सड़क पर पाइप दबाने की वजह से 20 मिनट के सफर में कई बार एक से दो घंटे लग रहे हैं। ऐसे में कसौली आने वाले टूरिस्ट को घर से डेढ़-दो घंटा पहले निकलना चाहिए। यहां पर दोपहर बाद ज्यादा जाम लग रहा है। पार्किंग- कसौली के ज्यादातर होटल में पार्किंग की समस्या नहीं है। 9. डलहौजी
वीकेंड पर 80% तक ऑक्यूपेंसी : चंबा जिले का सबसे मशहूर पर्यटन स्थल डलहौजी है। यहां पंजाब का सबसे ज्यादा टूरिस्ट पहुंचकर प्रकृति की खूबसूरती का आनंद उठाते हैं। डलहौजी के होटलों में 55% तक ऑक्यूपेंसी हो गई है। वीकेंड पर इसके 85% तक पहुंचने की उम्मीद है। यहां 1500 रुपए से लेकर 8000 रुपए तक के कमरे किराए पर आसानी से मिल जाते हैं। ट्रैफिक का हाल: पठानकोट-भरमौर नेशनल हाईवे होते हुए टूरिस्ट डलहौजी पहुंच सकते हैं। यदि कोई टूरिस्ट पहले ही मनाली-शिमला इत्यादि जगह पर हैं तो वह नूरपूर-लाहड़ू-ककीरा-डलहौजी सड़क से डलहौजी जा सकते हैं। पठानकोट से डलहौजी की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। इस सफर में ढाई से तीन घंटे का वक्त लग जाता है। अच्छी बात यह है कि डलहौजी में ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं रहती। पार्किंग: डलहौजी में पार्किंग की समस्या नहीं है। 10. भरमौर
60 प्रतिशत से ज्यादा ऑक्यूपेंसी : चंबा जिले के दुर्गम क्षेत्र भरमौर में भी इस बार बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। स्थानीय होटेलियर मंजू क्षत्रीय ने बताया कि बुधवार को 60 प्रतिशत से ज्यादा ऑक्यूपेंसी हो गई है। उन्होंने बताया कि इस बार भरमौर में इजरायली टूरिस्ट भी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। साथ ही पंजाब और हरियाणा के भी काफी टूरिस्ट भरमौर पहुंच रहे हैं। ट्रैफिक का हाल: पठानकोट-भरमौर NH से टूरिस्ट भरमौर पहुंच सकते हैं। भरमौर डलहौजी से 100 किलोमीटर दूर है। पठानकोट से भरमौर की दूरी लगभग 180 किलोमीटर है। मनाली-शिमला, धर्मशाला से भी टूरिस्ट नूरपूर-लाहड़ू-ककीरा सड़क से भरमौर जा सकते हैं। भरमौर में टूरिस्ट को ट्रैफिक जाम से नहीं जूझना पड़ता। पार्किंग: भरमौर में भी पार्किंग की समस्या नहीं है।

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