हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद (ZP) और पंचायत समिति (BDC) चेयरमैन व वाइस चेयरमैन चुनने के लिए अब टाइम लिमिट की कोई बंदिश नहीं रही। राज्य सरकार ने पंचायती राज एक्ट में संशोधन कर समय सीमा की शर्त हटा दी है। अब DC अपने हिसाब से कभी भी ZP और BDC चेयरमैन का चयन कर सकेंगे। कानून के जानकारों की मानें तो टाइम लिमिट खत्म होने के बाद चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चयन में छह महीने से एक साल भी लग सकता है। इससे सरकारी कामकाज प्रभावित होंगे। जब तक चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चयन नहीं होगा, तब तक ZP और BDC की बैठकें नहीं बुलाई जा सकेंगी। इन बैठकों में पंचायतों की योजनाएं, सड़क, पेयजल, बजट अनुमोदन जैसे विकास कार्यों की मंजूरी लाई जाती है। जनता ने जिस राजनीतिक माहौल में वोट दिया, लंबे इंतजार के बाद समीकरण बदल सकते हैं। अन्य राज्यों की तरह सदस्यों को ‘सेफ लोकेशन’ या होटल/रिसॉर्ट में रखने जैसी राजनीति पंचायत स्तर तक आ सकती है। टाइम लिमिट खत्म करने का क्या असर होगा? ZP और BDC चेयरमैन व वाइस चेयरमैन चुनने की टाइम लिमिट खत्म करने से प्रमुख राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ेगा। विपक्ष इसके संकेत दे चुका है। यदि किसी दल के पास बहुमत नहीं होगा तो वह बैठक को टालने के लिए दबाव बनाएगा। इससे चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चयन लटक जाएगा। हालांकि, जिला परिषद और बीडीसी के चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं होते। फिर भी एक्ट को बदलकर नई बहस को जन्म दिया गया है। 251 ZP और 1,769 BDC मेंबर चुन कर आएंगे बता दें कि प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर के साथ ZP और BDC के लिए भी नामांकन प्रक्रिया बीते गुरुवार को ही शुरू हो गई है, जो कि आज और 11 मई को भी जारी रहेगी। 12 मई को इनकी छंटनी होगी, जबकि 14 व 15 मई को इच्छुक दावेदार अपने नामांकन वापस ले सकेंगे। पंचायत चुनाव के लिए 26, 28 और 30 मई को मतदान होगा। ZP और BDC के रिजल्ट 31 मई को आएंगे। मगर अब नई अमेंडमेंट के बाद ZP चेयरमैन और वाइस चेयरमैन चुनने में वक्त लग सकता है। राज्य में 251 ZP सदस्य और 1 हजार 769 BDC मेंबर चुन कर आएंगे। राज्य के सभी 12 जिलों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन बनेंगे। इसी तरह प्रत्येक ब्लॉक में भी BDC चेयरमैन और वाइस चेयरमैन चुने जाएंगे।