हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में आशा वर्करों को बड़ी राहत दी है। रीना देवी व अन्य बनाम स्टेट मामले में अदालत ने सरकार द्वारा 02 मई 2026 को जारी उन आदेशों पर रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को पार्ट-टाइम कर्मचारी मानकर पंचायत पदों के लिए अयोग्य ठहराया गया था। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ताओं का पक्ष मजबूत है। इसलिए, विवादित आदेश को कोर्ट ने अगली सुनवाई तक स्टे कर दिया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 1 जून 2026 को तय की गई है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, सात याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें आशा वर्करों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने से सरकार के फैसले को चुनौती दी गई। इसमें तर्क दिया गया कि सरकार ने आशा वर्करों को पार्ट-टाइम और मानदेय आधारित कर्मचारी मानकर पंचायत चुनाव में भाग लेने से रोका है, जबकि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आशा वर्कर स्वयंसेवी होती हैं, जिन्हें वेतन नहीं बल्कि केवल प्रोत्साहन राशि (मानदेय) मिलता है। इसलिए उन्हें सरकारी कर्मचारी मानकर अयोग्य ठहराना गलत है। कोर्ट में क्या दलील दी गई? याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा- आशा वर्कर न तो नियमित कर्मचारी हैं और न ही कॉन्ट्रैक्ट पर। वे केवल मानदेय पर काम करती हैं। इस आधार पर उन्हें पंचायत प्रतिनिधि बनने से रोकना कानून के खिलाफ है। अदालत का फैसला हाईकोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और याचिकाकर्ताओं का पक्ष मजबूत है। इसलिए सरकार का 2 मई 2026 का आदेश फिलहाल लागू नहीं होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है। क्या असर पड़ेगा? कोर्ट के इन आदेशों के बाद आशा वर्करों को फिलहाल पंचायत चुनाव लड़ने का रास्ता खुल गया है। इसलिए, इस फैसले को आशा वर्करों के लिए राहत वाला माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि पंचायत प्रतिनिधि चुने जाने के बाद आशा वर्कर क्या अपनी अस्थाई नौकरी कंटीन्यू कर पाएंगी या उन्हें आशा वर्कर का पद छोड़ना होगा। इसे लेकर स्थिति कोर्ट के विस्तृत ऑर्डर आने के बाद ही स्पष्ट होगी। बता दें कि राज्य में 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों 3758 पंचायतों के चुनाव होने जा रहे है। इसके लिए कल सात मई से नॉमिनेशन शुरू हो रहे है। यह नामांकन प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्यस और जिला परिषद के लिए होंगे। सरकारी खजाने से दिया जाता है मानदेय हाईकोर्ट के फैसले के बाद आशा वर्कर भी अब कल से शुरू हो रहे नामांकन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी और चुनाव लड़ पाएगी। राज्य में लगभग 20 हजार आशा वर्कर है। इन्हें सरकारी खजाने से मानदेय दिया जाता है। इस वजह से सरकार ने इनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी। इनकी सेवाएं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ली जा रही है।