हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगम चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। इन नतीजों से भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है, वहीं राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस इसे TMC के खिलाफ 15 साल की एंटी इनकंबेंसी बता रही है। प्रदेश में 17 मई को सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगम के चुनाव होने हैं, जिन्हें 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है, क्योंकि नगर निगम चुनाव पार्टी सिंबल पर होते हैं। यह सुक्खू सरकार के लिए बड़ी परीक्षा हैं। नतीजे यह बताएंगे कि राज्य में मौजूदा सरकार की लोकप्रियता कितनी है और विपक्ष कितनी मजबूती से वापसी कर पा रहा है। बंगाल-असम के नतीजों ने हिमाचल के निगम चुनाव को हाई-स्टेक बनाया कुल मिलाकर, बंगाल-असम के नतीजों ने हिमाचल के नगर निगम चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प और हाई-स्टेक बना दिया है। कांग्रेस की जीत सुक्खू सरकार की साढ़े तीन साल की उपलब्धियों पर मुहर होगी, जबकि भारतीय जनता पार्टी की जीत सत्ता में वापसी के संकेत देगी। बीजेपी नेता डबल उस्ताह के साथ उतरेंगे वहीं, बंगाल और असम में मिली जीत के बाद भाजपा संगठन डबल उत्साह के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं का दावा है कि इसका असर हिमाचल के शहरी मतदाताओं पर भी पड़ेगा। सुक्खू बोले- कमर्शियल LPG की कीमतों में बढ़ोतरी का BJP को नुकसान वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को उम्मीद है कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम 1000 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाए हैं, राज्य के चार नगर निगम चुनाव में शहरी क्षेत्रों की जनता बीजेपी को इसका करारा जवाब देगी। इससे बीजेपी को नुकसान झेलना पड़ सकता है। 17 मई को मतदान बता दें कि राज्य के 4 नगर निगम के अलावा 47 नगर परिषद और नगर पंचायतों में 17 मई को मतदान होना है। इन चुनावों में 1 लाख 80 हजार 963 पुरुष, 1 लाख 79 हजार 882 महिलाएं और 14 अन्य मतदाता मतदान करेंगे। कुल मिलाकर 3 लाख 60 हजार 859 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले 1 हजार 808 ऐसे मतदाता हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे। नगर पंचायत और नगर परिषद के रिजल्ट मतगणना वाले दिन आएंगे, जबकि नगर निगम चुनाव के नतीजे 31 मई को आएंगे।

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