हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की आज पुण्यतिथि है, लेकिन कांग्रेस सरकार उनकी पुण्यतिथि भूल गई है। इस उपलक्ष्य पर आज कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। भारतीय जनता पार्टी ने इसकी निंदा की है। बता दें कि डॉ. परमार का 2 मई 1981 को निधन हुआ था। 4 अगस्त, 1984 को रिज पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई। इसके बाद से हर साल सरकारी स्तर पर उनकी पुण्यतिथि और जयंती मनाई जाती रही है और यहां पर मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, विभिन्न दलों के नेता और अधिकारी हर वर्ष उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते रहे हैं। इस दौरान हिमाचल निर्माता डॉ. परमार के योगदान को याद किया जाता है। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की अलग पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए लंबा संघर्ष किया। स्वतंत्रता के बाद जब पहाड़ी इलाकों के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति थी, तब उन्होंने हिमाचल को एक अलग इकाई के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाई। डॉ. परमार के प्रयासों से मिला पूर्ण राज्य का दर्जा डॉ. परमार के प्रयासों का ही परिणाम था कि हिमाचल को पहले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला और बाद में 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि में उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता और नेतृत्व की अहम भूमिका रही। मगर कांग्रेस सरकार अपनी ही पार्टी के प्रदेश का निर्माण करने वाले नेता को भूल गई है। बीजेपी ने की निंदा वहीं, राज्य सरकार द्वारा डॉ. परमार की पुण्यतिथि को लेकर कोई औपचारिक कार्यक्रम न किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाए हैं। भाजपा नेता करण नंदा ने कहा कि दूरदर्शी सोच, सादगी और जनसेवा के प्रतीक डॉ. परमार की पुण्यतिथि भूलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पहले उन्होंने डॉ. परमार को पुष्पांजलि अर्पित की।