हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में आज पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी। राज्य के सभी डीसी ने बीते सात अप्रैल को आरक्षण रोस्टर जारी किया था। इसे कुछ लोगों ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। आरोप है कि आरक्षण रोस्टर लागू करने के नियमों की अनदेखी की गई। इस तरह की एक नहीं, बल्कि कई याचिकाएँ हाईकोर्ट में दायर की गई हैं। इन सभी को आज कोर्ट सुनेगा। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्टेट इलेक्शन कमीशन को नोटिस भेजकर जवाब माँग रखा है। सरकार और इलेक्शन कमीशन भी आज अपना जवाब कोर्ट में दायर करेंगे। यह मामला जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बेंच में लगेगा। याचिकाओं में आरोप है कि कई स्थानों पर जनसंख्या के वास्तविक आंकड़ों को नज़रअंदाज़ करते हुए सीटों को आरक्षित किया गया, जिससे रोस्टर में गलत बदलाव हुआ है। ऐसे में सबकी नज़रें हाईकोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं, क्योंकि एक पंचायत का रोस्टर बदलने से उस ब्लॉक की दूसरी पंचायतों के रोस्टर में भी बदलाव की संभावना रहती है। जिनके वार्ड-पंचायत आरक्षित, उन्हें रोस्टर में बदलाव की उम्मीद वहीं स्टेट इलेक्शन कमीशन पंचायत और नगर निकाय चुनाव की सभी तैयारियाँ पूरी कर चुका है। कभी भी चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में मतदान राज्य की 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में मतदान होना है। इनमें चार निगम (सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर) के चुनाव भी शामिल हैं। ये बड़े चुनाव हैं, क्योंकि नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्ह पर होने हैं। ऐसे में मामला हाईकोर्ट पहुँचने से उन लोगों को आरक्षण रोस्टर में बदलाव की उम्मीद जगी है, जिनके अपने वार्ड-पंचायत आरक्षित हो गए हैं।