हिमाचल प्रदेश में सहायक वन रक्षक भर्ती के सुक्खू सरकार के हालिया फैसले का विरोध तेज हो गया है। वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने इस निर्णय को कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। महासंघ ने सरकार पर कर्मचारियों को बांटने का आरोप भी लगाया है। मंडी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में वन वृत मंडी के अध्यक्ष छोटू यादव ने बताया कि पिछले छह वर्षों से वन रक्षकों की नियमित भर्ती नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान सरकार ने युवाओं को गुमराह कर आउटसोर्स आधार पर वन मित्रों की भर्ती की। वन रक्षक कैडर को समाप्त करने के प्रयास यादव ने आगे कहा कि अब सहायक वन रक्षक के नाम पर एक नया पद सृजित करके वन रक्षक कैडर को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह से अनुचित है। महासंघ के अनुसार, वन विभाग में अभी भी लगभग 650 पद रिक्त हैं, जिन्हें पुरानी भर्ती प्रक्रिया के तहत भरा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि नई भर्ती होती है, तो उसमें वन मित्रों के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाए। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि सहायक वन रक्षक का पद कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सड़कों पर उतरकर किया जाएगा आंदोलन महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को जल्द वापस नहीं लिया, तो प्रदेश भर के कर्मचारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी ऐसी नीतियां बनाकर सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। प्रेस वार्ता से पूर्व, महासंघ ने एडीसी मंडी और वन वृत अरण्यपाल के माध्यम से सरकार को एक ज्ञापन भेजा। इस अवसर पर मंडी वन मंडल कोषाध्यक्ष योगेश, जोगिंदर नगर के महासचिव विशाल, मंडी महासचिव धर्मपाल, वन परिक्षेत्र अध्यक्ष तिलक और वनरक्षक गुलशन सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।