हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर से BJP विधायक आशीष शर्मा के चाचा और भाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। स्टोन क्रशर से जुड़े कथित अवैध खनन और रिकॉर्ड में गड़बड़ी मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद दोनों ने आज सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया। कोर्ट ने दोनों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। कल दोनों को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा। इससे पहले, हिमाचल हाईकोर्ट भी इनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है। इसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली और चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने को कहा गया था।सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन आज खत्म हो रही थी। लिहाजा दोनों आरोपी उमेश शर्मा और प्रवीण कुमार अदालत में पेश हुए और आत्मसमर्पण कर दिया। क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला स्टोन क्रशर संचालन में कथित अवैध खनन और दस्तावेजी अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने एसपी के नेतृत्व में संबंधित क्रशर यूनिट्स पर छापेमारी की थी। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए थे, जो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। अवैध खनन में चार आरोपी, दो को सुप्रीम कोर्ट से राहत इस केस में कुल चार आरोपी शामिल थे, जिनमें से दो को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है, जबकि विधायक के चाचा और भाई को अदालत से राहत नहीं मिली। पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही उनकी जमानत याचिकाएं लगातार खारिज होती रही हैं। अगस्त 2025 का है मामला यह मामला अगस्त 2025 में दर्ज किया गया था और जांच के बाद नवंबर में रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई थी। दिसंबर में हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों की जमानत खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुजानपुर में दर्ज है मामला एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ठाकुर ने बताया कि अवैध खनन मामला सुजानपुर में दर्ज है। दोनों आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था, जो आज पूरा हो रहा था। इसके बाद दोनों ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया। बीजेपी ने प्रतिशोध की राजनीति बताया इस कार्रवाई पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा एतराज जताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने भाजपा विधायक के परिजनों से जुड़े मामले में कांग्रेस सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति और एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा विपक्षी नेताओं व परिवारों को निशाना बनाकर कार्रवाई हो रही है, जबकि अपराध और माफिया पर सरकार मौन है। इसे सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच पर सवाल उठाए। मामला अदालत में विचाराधीन है, फिर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। कानून व्यवस्था बिगड़ रही है और सरकार ध्यान भटकाने में लगी है। भाजपा लोकतांत्रिक जवाब देगी और सच जनता के सामने रखेगी। जनता देख रही है।

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