हिमाचल हाईकोर्ट ने पूर्व विधायकों की पेंशन जारी करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए कि पात्र याचिकाकर्ताओं की बकाया और नियमित पेंशन एक माह के भीतर जारी की जाए। आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दिए। कोर्ट में राजिंदर राणा और रवि ठाकुर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई थी, जिनमें पेंशन जारी करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान विधानसभा सचिवालय की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पहले लाया गया संशोधन विधेयक, जिसमें अयोग्य घोषित विधायकों की पेंशन रोकने का प्रावधान था, उसे राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। निर्वाचित विधायकों पर लागू होगा आदेश इसके बाद नया विधेयक लाया गया है, जो केवल 14वीं विधानसभा और उसके बाद निर्वाचित विधायकों पर लागू होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता 12वीं और 13वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं, इसलिए वे नए कानून के दायरे में नहीं आते और पेंशन के हकदार हैं। इसी आधार पर अदालत ने पेंशन जारी करने के निर्देश दिए। इस फैसले से प्रदेश के पूर्व विधायकों को बड़ी राहत मिली है और पेंशन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर स्पष्टता आई है। कांग्रेस के छह विधायकों ने फरवरी 2024 में की थी क्रॉस वोटिंग बता दें कि कांग्रेस के छह विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट किया था। इसके बाद स्पीकल कुलदीप सिंह पठानिया ने उन्हें अयोग्य ठहराया। तब कांग्रेस सरकार ने इनकी पेंशन रोकने के लिए 2024 में विधानसभा में संशोधन विधेयक लाया। हालांकि, इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पाई। इसके बाद सुक्खू सरकार ने विधानसभा के हाल में संपन्न बजट सेशन में दोबारा संशोधन विधेयक लाया। चैतन्य-भुट्टों की पेंशन बंद हो जाएगी इसमें अब यह प्रावधान किया गया कि 14वीं विधानसभा या फिर भविष्य में जो भी विधायक अयोग्य ठहराए जाएंगे उनकी पेंशन बंद होगी। अब यह बिल राज्यपाल की मंजूरी को भेजा जाएगा। यदि राज्यपाल की मंजूरी मिली तो 14वीं विधानसभा के कुटलेहड़ से पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टों और गगरेट से चैतन्य शर्मा की पेंशन भी बंद हो जाएगी। कांग्रेस सरकार पर तमाचा है कोर्ट का फैसला: आशीष भाजपा प्रवक्ता एवं विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झूठ गढ़ने, विपक्ष को निशाना बनाने और विरोध करने वाले नेताओं को परेशान करने की नीति अपनाई, लेकिन अब न्यायालय के फैसले ने उनके इस एजेंडे पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला कांग्रेस सरकार पर तमाचा है। कांग्रेस ने कानून को बदले का हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि कानून किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि भविष्य के लिए बनाए जाते हैं।