हिमाचल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 24 सरकारी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से डी-नोटिफाई (बंद) करने का आदेश जारी किया है। इनमें 19 सरकारी प्राइमरी स्कूल (GPS) और 5 सरकारी मिडिल स्कूल (GMS) शामिल हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार- इन स्कूलों में एक भी बच्चा पंजीकृत नहीं था। इस वजह से स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का तर्क है कि जिन स्कूलों में छात्र ही नहीं हैं, उन्हें चलाए रखना संसाधनों की बर्बादी है। ऐसे में इन स्कूलों को बंद कर शिक्षकों और संसाधनों का बेहतर उपयोग अन्य स्कूलों में किया जाएगा, जहां छात्रों की संख्या अधिक है। यह फैसला प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ये स्कूल शिमला, सिरमौर, सोलन और लाहौल और स्पीति जिलों में स्थित हैं। इन क्षेत्रों के स्कूल प्रभावित शिमला जिले में सबसे ज्यादा 15 प्राइमरी और 1 मिडिल स्कूल डिनोटिफाई किए गए हैं। इनमें टिक्कर, कुमारसैन, ठियोग, रामपुर, जुब्बल, चौहारा, नेरवा, कुपवी और सुन्नी जैसे शिक्षा खंडों के स्कूल शामिल हैं। सिरमौर जिले में राजगढ़, नारग और सुरला ब्लॉक के स्कूल बंद किए गए हैं, जबकि सोलन के कंडाघाट क्षेत्र का एक प्राइमरी स्कूल भी सूची में है। वहीं लाहौल-स्पीति जिले के उदयपुर और केलांग क्षेत्रों के 4 मिडिल स्कूलों को भी डी-नोटिफाई किया गया है। स्टाफ और संसाधनों का होगा समायोजन आदेश में कहा गया कि इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों, भवन, रिकॉर्ड और अन्य संसाधनों का समायोजन सरकार द्वारा पहले जारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूरी कर तत्काल अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस आदेश पर कार्रवाई करें और सभी कोडिंग व प्रशासनिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करें। 1200 स्कूल पहले भी बंद किए जा चुके कांग्रेस इससे पहले भी 1200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को बंद कर चुकी है। पिछले एक दशक के दौरान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम हुई है।

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