हिमाचल में 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं को चलाने वाले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर पांच दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक चलेगी। हड़ताल के पहले दिन सैकड़ों कर्मचारी शिमला पहुंचे और सचिवालय छोटा शिमला के बाहर महापड़ाव पर बैठ गए। प्रदेशव्यापी हड़ताल के कारण ग्रामीण एम्बुलेंस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है। वहीं यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार और महासचिव बालक राम ने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन कार्यरत पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारियों का लंबे समय से शोषण किया जा रहा है। निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं मिलने का आरोप यूनियन नेताओं ने बताया कि कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है, जबकि उनसे 12-12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है। इसके बावजूद उन्हें ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और श्रम विभाग के आदेशों के बावजूद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। यूनियन नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांगें उठाने पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन से जुड़े कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं या उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना किसी कारण के महीनों तक ड्यूटी से बाहर रखा जाता है और उन्हें नियमानुसार छुट्टियां भी नहीं दी जातीं। दोनों हिस्सों का पैसा कर्मचारियों से ही काटा जा रहा इसके अतिरिक्त, ईपीएफ और ईएसआई में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा गया कि दोनों हिस्सों का पैसा कर्मचारियों से ही काटा जा रहा है। कर्मचारियों का मूल वेतन भी कम निर्धारित किया गया है, जिससे श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। यूनियन ने यह मुद्दा भी उठाया कि पूर्व में जीवीके ईएमआरआई के तहत कार्यरत कर्मचारियों को सेवा समाप्ति पर ग्रेच्युटी, नोटिस पे और अन्य देयकों का भुगतान नहीं किया गया। साथ ही, कम वेतन के एरियर का भी भुगतान नहीं हुआ है।

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