हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर का इंतजार किया जा रहा था, जो अब खत्म होने जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार आज शाम पांच बजे तक सभी जिलों में पंचायत चुनावों के लिए DC को आरक्षण रोस्टर जारी करना है। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि तय समय सीमा के भीतर हर हाल में रोस्टर जारी होना चाहिए, जिससे चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सके। हालांकि, इस बीच स्थिति कुछ जटिल भी हो गई है। जिन जिलों में DC ने बीते सोमवार को ही आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया था और उसमें राज्य सरकार द्वारा दी गई 5 फीसदी अतिरिक्त आरक्षण तय करने की शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है, वहां अब रोस्टर को नए सिरे से तैयार करना होगा, क्योंकि कोर्ट ने DC को दी गई 5 फीसदी शक्तियों को गैरकानूनी बताकर इस पर रोक लगा दी है। लिहाजा DC को आरक्षण रोस्टर की प्रक्रिया फिर से अपनानी होगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनावों की समयसीमा भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 31 मई से पहले पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। इससे राज्य सरकार और स्टेट इलेक्शन कमीशन पर समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।
73 नगर निकायों में भी साथ होंगे चुनाव पंचायतों के साथ-साथ 73 नगर निकायों में भी चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य सरकार ने अभी पंचायतों और नगर निकायों में प्रशासक लगा रखे हैं, क्योंकि ज्यादातर नगर निकायों का कार्यकाल 17 जनवरी 2026 और पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को पूरा हो चुका है। उस दौरान इलेक्शन कमीशन चुनाव कराने को तैयार था, लेकिन सरकार ने तब आपदा का हवाला देकर चुनाव टाल दिए। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई की दी डेडलाइन पहले हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने के आदेश दिए थे। इन आदेशों के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने का अतिरिक्त समय देते हुए 31 मई से पहले चुनाव कराने को कहा। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद आरक्षण रोस्टर के नियमों में बदलाव किया, हालांकि इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

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