हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालतों के बुनियादी ढांचे में सुधार के मामले में लापरवाही पर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने अदालतों की सुविधाएं बढ़ाने के अनुरोध को गंभीरता से नहीं लिया और केवल एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालती रही। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस जिया लाल भारद्वाज की बेंच ने यह आदेश जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने वित्त विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया है कि वे न्यायपालिका के बजट से जुड़ी पूरी जानकारी दें। कोर्ट ने न्यायपालिका के बजट से जुड़ी जानकारी मांगी कोर्ट ने पूछा है कि पिछले साल कितना बजट दिया गया था, इस साल कितना प्रावधान है और क्या इसमें बढ़ोतरी हुई है या नहीं। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अगली सुनवाई तक सरकार ने जरूरी कदम नहीं उठाए, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एनडीपीएस मामलों के निपटारे को विशेष अदालतें जरूरी कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए नए न्यायालय बनाना जरूरी है। केंद्र सरकार भी एनडीपीएस मामलों को निपटाने के लिए विशेष अदालतें बनाने को कह चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कोर्ट ने सरकार के नशामुक्त प्रदेश के दावों पर उठाए सवाल कोर्ट ने सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि नशामुक्त प्रदेश बनाने के वादे सिर्फ कागजों तक सीमित लगते हैं। बिना पर्याप्त ढांचे के नए कोर्ट बनाना संभव नहीं है।कोर्ट ने यह भी कहा कि 20 साल पुराने ढांचे के सहारे बढ़ते मामलों को संभालना संभव नहीं है, लेकिन सरकार इस जरूरत को पूरा करने में नाकाम रही है।