कांगड़ा घाटी रेलमार्ग पर रेल बहाली का इंतजार कर रही जनता का आक्रोश आज रेलवे स्टेशन कोपर लाहड़ में देखने को मिला। रेलवे संघर्ष समिति के बैनर तले जनता, टैक्सी ऑपरेटरों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने एक साथ मिलकर रेलवे विभाग, रेल मंत्रालय और हिमाचल के सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान तीखी नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई। उपस्थित जनता ने कांगड़ा घाटी की रेल को क्षेत्र की जीवनरेखा बताया। उन्होंने इसके बंद रहने से आम जनता को हो रही समस्याओं का जिक्र करते हुए अपने जनप्रतिनिधियों की कड़ी आलोचना की। लोगों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि चक्की पुल बनने के बाद कांगड़ा घाटी की जनता को उम्मीद थी कि रेल सेवा जल्द बहाल होगी, लेकिन रेल मंत्रालय और रेल विभाग अलग-अलग कारणों का बहाना बनाकर बहाली में टालमटोल करते रहे। सांसदों की चुप्पी बर्दाश्त नहीं, संघर्ष तेज करने की चेतावनी जनता ने स्पष्ट किया कि हिमाचल के सांसदों की चुप्पी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में संघर्ष को और भी तेज किया जाएगा। यह उल्लेखनीय है कि कांगड़ा घाटी रेल गरीब लोगों की आवाजाही का एक सुगम साधन है। इसके संचालन से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, शक्तिपीठों के श्रद्धालुओं को आवागमन की सुविधा मिलती है, स्थानीय बाजारों को रोजगार मिलता है, स्कूली छात्रों को सुविधा होती है, टांडा अस्पताल जाने वाले लोगों और टैक्सी चालकों को भी रोजगार मिलता है। रेलवे संघर्ष समिति ने की नई कार्यकारिणी की घोषणा संघर्ष समिति के अध्यक्ष पीसी विश्वकर्मा ने बताया कि चक्की पुल तैयार हुए चार महीने से अधिक समय हो चुका है, लेकिन रेलवे कुछ नेताओं के दबाव में रेल बहाली को टालता आ रहा है। इसके अतिरिक्त, कई वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने भी रेलवे की कार्यप्रणाली का कड़ा विरोध किया। रेलवे संघर्ष समिति ने अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा की।