कांगड़ा जिले के धर्मशाला में निचले हिमाचल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा की बदहाली पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की खराब स्थिति के कारण लाखों मरीजों की जान जोखिम में है। परमार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर और ऊना जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाला यह अस्पताल अब खुद ही बीमार हो चुका है। विशेषकर कार्डियोलॉजी विभाग की स्थिति चिंताजनक है। डॉक्टरों की कमी को लेकर सरकार पर किया तंज परमार ने बताया कि निचले हिमाचल की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए टांडा पर निर्भर है। सरकार की अनदेखी के कारण कार्डियोलॉजी विभाग केवल एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। आपातकालीन स्थिति में विशेषज्ञ की कमी के चलते मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करना पड़ता है। रास्ते में दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही निचले हिमाचल से चंडीगढ़ पहुंचने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। दिल के मरीजों के लिए यह समय ‘गोल्डन ऑवर’ की बर्बादी साबित होता है, जिससे रास्ते में दम तोड़ने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। गरीब मरीज, जो निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार एक ओर स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिकता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर निचले हिमाचल के इस महत्वपूर्ण केंद्र में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें और टेस्ट के लिए हफ्तों का इंतजार सामान्य हो गया है। विपिन सिंह परमार ने दी आंदोलन की चेतावनी पूर्व मंत्री ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि टांडा में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तुरंत तैनाती नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। परमार ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं जनता का अधिकार हैं।

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