धर्मशाला नगर निगम के ‘पर्यटन राजधानी’ बनाने के दावों और जमीनी हकीकत में गहरा विरोधाभास सामने आया है। हाल ही में नगर निगम के बजट में सीवरेज मेंटेनेंस के लिए एक करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी मैक्लोडगंज की सड़कें आज भी सीवरेज के पानी से लबालब हैं। नगर निगम कमिश्नर जफर इकबाल ने बजट में सीवरेज मेंटेनेंस के लिए विशेष राशि आवंटित करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद, शहर का 1991 में स्थापित 6 इंच का पुराना सीवरेज नेटवर्क पूरी तरह जवाब दे चुका है। 33 साल पुराने इस सिस्टम पर क्षमता से कई गुना अधिक बोझ है, जिसके कारण ओवरफ्लो नालियां और पाइपलाइन ब्लॉक होना एक आम समस्या बन गई हैं। अभी तक शुरू नहीं हुए मरम्मत के काम स्थानीय लोगों का आरोप है कि बजट की घोषणाएं केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित हैं। उनका कहना है कि पिछले 26 वर्षों से लंबित मरम्मत कार्य अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। प्रदूषित सीवरेज का पानी सीधे प्राकृतिक खड्डों में मिल रहा है, जिससे भविष्य में महामारी फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति पर जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। वहीं, नगर निगम के नए वार्डों के लिए प्रस्तावित 136 करोड़ रुपए का बजट भी अभी तक फाइलों में ही कैद है और धरातल पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। हाईकोर्ट और एनजीटी से हस्तक्षेप की मांग पर्यावरणविदों ने अब इस गंभीर विरोधाभासी स्थिति पर हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से हस्तक्षेप की मांग की है। यदि बजट में किए गए विशेष प्रबंध जमीन पर नहीं उतरे, तो मैक्लोडगंज की यह दुर्गंध न केवल पर्यटन को प्रभावित करेगी, बल्कि धर्मशाला के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर सकती है।

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