अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश के सड़क निर्माण कार्यों पर भी साफ नजर आने लगा है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बिटुमेन और एलडीओ (लाइट डीजल ऑयल) की दरों में भारी वृद्धि हुई है। राज्य में इससे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के तहत चल रहे टारिंग और मेटलिंग कार्य पर तलवार लटक गई है। हिमाचल कॉट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश विज के अनुसार- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बिटुमेन और एलडीओ के रेट में भारी उछाल आया है। उन्होंने बताया कि DPR तैयार करते समय बिटुमेन की दर ₹43 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर ₹86.60 तक पहुंच चुकी है। यानी बिटुमेन के रेट दोगुणा हो गए है। इसी तरह, एलडीओ की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। एलडीओ का इस्तेमाल टारिंग और मेटलिंग में प्रयोग वाली मशीनों में किया जाता है। इस वजह से ठेकेदारों को मौजूदा परिस्थितियों में काम करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो गया है। खाड़ी देशों में तनाव के कारण प्रोजेक्ट की लागत में अप्रत्याशित इजाफा सतीश विज ने बताया कि खाड़ी देशों में तनाव के बाद PMGSY-3 के प्रोजेक्ट की लागत में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है। इससे प्रोजेक्ट को पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस बारे PWD विभाग के अधिकारियों को भी सूचित कर दिया है और विभाग ने भी केंद्र को इससे अवगत करवा दिया है। मगर अब तक ठेकेदारों की समस्या का समाधान नहीं निकला पाया। इसे देखते हुए ठेकेदार PMGSY के तहत काम रोकने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते तब काम शुरू नहीं किए जाएंगे। PMGYS-4 पर भी असर पड़ेगा ठेकेदारों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका असर PMGSY फेज-4 पर भी पड़ेगा और नए टेंडर जारी होने के बावजूद कार्य शुरू नहीं हो पाएंगे। इससे राज्य के ग्रामीण सड़क विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित होने के साथ-साथ ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता लेकर जल्द से जल्द मुआवजे का प्रावधान किया जाए, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके। इन देशों से आयात होता है बिटुमिन बिटुमिन के लिए भारत दूसरे देशों पर निर्भर है। भारत में बिटुमिनस आमतौर पर इराक, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और सिंगापुर से आयात किया जाता है। सबसे ज्यादा बिटुमिनस इराक से आयात होता है। भारत में भी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम बिटुमिन बनाता है, लेकिन सड़क निर्माण की बड़ी जरूरत विदेशों से ही पूरी होती है।