हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के बड़सर ग्राम पंचायत में खाद्य प्रसंस्करण के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब का उद्घाटन किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण उद्यमिता को सुदृढ़ करना और खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाना है। यह हब राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), कुंडली, सोनीपत द्वारा सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के सहयोग से स्थापित किया गया है। यह परियोजना भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सीड प्रभाग के अंतर्गत समर्थित है। इस अवसर पर निफ्टेम के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबरॉय ने प्रमुख अन्वेषक एवं खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रजनी चोपड़ा को हब की स्थापना के लिए बधाई दी। विकसित नवाचारों को ग्रामीणों तक पहुंचाना जरुरी : हरिंदर सिंह उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निफ्टेम में विकसित नवाचारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना आवश्यक है, जिससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके। डॉ. ओबरॉय ने कहा कि यह हब हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक एवं नवाचार के हस्तांतरण के लिए एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगा। यह पहल विशेष रूप से अलसी (फ्लैक्ससीड) के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य कम लागत वाले, पौष्टिक खाद्य उत्पाद विकसित करना और सतत आजीविका को बढ़ावा देना है। यह सुविधा कांगड़ा जिले के बड़सर गांव में जनजातीय समुदाय आधारित स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी। इस सुविधा का औपचारिक उद्घाटन सीएसकेएचपीकेवी, पालमपुर के कार्यवाहक कुलपति डॉ. एके पांडा द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन डॉ. चंद्रकांता वत्स, खाद्य विज्ञान, पोषण एवं प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अनुपमा सांडल, स्थानीय जनप्रतिनिधि और स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे। होगी ग्रामीणों की आजीविका मजबूत यह हब स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय समुदायों को तकनीकी प्रशिक्षण, अवसंरचना तथा वैज्ञानिक सहयोग प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य करेगा। उन्नत वैज्ञानिक ज्ञान को पारंपरिक प्रथाओं के साथ जोड़कर यह पहल आय के अवसरों को बढ़ाने एवं ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में सहायक होगी। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि यह हब किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पादों के प्रसंस्करण, मानकीकरण एवं विपणन में अधिक दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अलसी आधारित नवाचारों पर केंद्रित यह पहल सस्ती पोषण, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने में सहायक होगी। इस हब की स्थापना शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी एजेंसियों एवं स्थानीय प्रशासन के बीच मजबूत सहयोग का परिणाम है, जो भारत में समावेशी विकास, तकनीकी उन्नति एवं सतत ग्रामीण विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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