हिमाचल सरकार ने पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर लगाने के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत 95 प्रतिशत पंचायतों का आरक्षण नियमों के तहत होगा, जबकि 5 प्रतिशत पंचायतों में डीसी आरक्षण रोस्टर बदल सकेंगे। संशोधित नियमों में तर्क दिया गया कि यह बदलाव भौगोलिक या विशेष परिस्थितियों को देखते हुए किया जाएगा। वहीं हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर 7 अप्रैल तक हर हाल में जारी करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोस्टर 13 फरवरी 2026 की स्थिति के आधार पर तैयार किया जाए और उसी आधार पर पंचायत चुनाव करवाए जाएं। 13 फरवरी के बाद गठित पंचायतों पर मैरिट पर फैसला होगा: कोर्ट कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में 13 फरवरी 2026 के बाद गठित नई पंचायतों, पुरानी पंचायतों के विभाजन और पुनर्गठन से जुड़ी अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाले मामलों का फैसला बाद में मेरिट के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल इनसे संबंधित प्रक्रिया पर रोक जारी रहेगी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर अंतरिम आदेश देते हुए विवादित पंचायतों से जुड़े ड्राफ्ट प्रस्तावों और अधिसूचनाओं पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। इसके चलते आरक्षण रोस्टर तय करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी। सरकार ने आरक्षण रोस्टर को मांगा था अतिरिक्त समय राज्य सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट से रोस्टर जारी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसे स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 7 अप्रैल तक आवश्यक कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च की दी थी डेटलाइन वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- सभी जिलों के डीसी को आज (31 मार्च तक) हर हाल में पंचायत व नगर निकाय चुनाव को आरक्षण रोस्टर तय करना था। अब कोर्ट ने सरकार को सात दिन की मोहलत दी है। इससे पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक हजारों दावेदारों का आरक्षण रोस्टर के लिए इंतजार लंबा हो गया है। 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में होने है चुनाव प्रदेश की 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव है। पंचायतों में प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए इलेक्शन होने है, जबकि शहरी निकायों में पार्षदों का चयन होना है। इनमें से उप प्रधान को छोड़कर हर पद के लिए आरक्षण रोस्टर लगता है। पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका पंचायतों और नगर निकायों के पूर्व पदाधिकारियों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस वजह से पंचायत और निकायों में सरकार ने एडमिन्स्ट्रेटर बिठा रखे हैं, क्योंकि राज्य में चुनाव समय पर नहीं करवाए जा सके।

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