मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के बेटे पर हुए अपहरण और फिरौती मांगने के प्रयास के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस वारदात में कुल पांच आरोपी शामिल थे और इसकी साजिश पिछले तीन से चार महीनों से रची जा रही थी। शिमला पुलिस की जांच में सामने आया है कि वारदात के दिन सभी आरोपी एक ही वाहन में सवार होकर तारापुर पहुंचे थे। उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से इस घटना को अंजाम देने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में पहले ही चरणजीत सिंह, टशी छेरिंग नेगी और मनीष वर्मा उर्फ मोनू नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। आगे की पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो और आरोपियों की संलिप्तता सामने आई। मशोबरा और ठियोग से हुई गिरफ्तारी तकनीकी जांच में राजेंद्र कुमार उर्फ राजू और मनमोहन चौहान उर्फ अनु की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मशोबरा और ठियोग से हिरासत में लेकर पूछताछ की और फिर विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के साथ ही अब इस मामले में शामिल सभी पांचों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दोनों आरोपियों को भी न्यायालय में पेश किया पहले गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को अदालत से पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। वहीं, नए गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को भी न्यायालय में पेश किया जा रहा है। जिला शिमला पुलिस ने बताया है कि इस मामले की जांच गहराई से की जा रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।