हिमाचल के शहरी विकास विभाग ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारी एवं DC को 53 स्थानीय शहरी निकायों (ULBs) के लिए आरक्षण रोस्टर जल्द लगाने के निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने आज (गुरुवार को) इस संबंध में सभी डीसी को एक पत्र लिखा है, जिसमे ‘मोस्ट अर्जेंट-टाइम बाउंड’ मानकर रिजर्वेशन रोस्टर लगाने को बोला गया है। वहीं, राज्य में नए बनाए गए स्थानीय शहरी निकायों (ULBs) में सरकार अभी चुनाव नहीं कराना चाह रही। इसके लिए स्टेट इलेक्शन कमीशन से अनुमति मांगने का जिक्र पत्र में किया गया है। मगर, इलेक्शन कमीशन ने सरकार को वापस पत्र लिखकर साफ कह दिया है कि सभी नगर निकायों में चुनाव एक साथ करवाए जाएंगे, क्योंकि एक साथ इलेक्शन नहीं करवाने पर आचार संहिता बार-बार लगानी पड़ती है। इसका असर विकास कार्यों पर भी पड़ता है और खर्च भी बार-बार करना पड़ता है। 21 स्थानीय शहरी निकायों में चुनाव पर सस्पेंस राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के इन पत्रों के बाद नए ULBs में चुनाव पर सस्पेंस बन गया है। इसे लेकर आने वाले दिनों में सरकार और इलेक्शन कमीशन आमने-सामने हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी निकाय चुनाव एक साथ कराने के आदेश दे रखे वहीं, हिमाचल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 31 मार्च से पहले सभी ULBs में आरक्षण रोस्टर लगाया जाना है और 31 मई से पहले चुनाव करवाए जाने है। मगर शहरी विकास विभाग द्वारा आज डीसी को लिखे पत्र के मुताबिक, सरकार अभी 21 निकायो में चुनाव नहीं कराना चाहती। हालांकि कानून में दो साल तक चुनाव नहीं कराए जाने का प्रावधान है। मगर यह कॉल इलेक्शन कमीशन को लेनी है कि कब चुनाव कराए जाए। हिमाचल में शहरी निकाय बता दें कि, हिमाचल में 75 नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायतें है। इनमें से शिमला नगर निगम को छोड़कर हर जगह चुनाव ड्यू है। 47 से ज्यादा निकायों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है और सरकार ने इनमें एडमिनिस्ट्रेटर लगा रखे है। कायदे से ये चुनाव 15 जनवरी से पहले होने थे। मगर सरकार आपदा एक्ट की आड़ में चुनाव कराने को तैयार नहीं हुई। अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कराने के आदेश दिए हैं।