हिमाचल प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य की राजधानी शिमला से जल्द ‘थर्ड फ्रंट’ के औपचारिक ऐलान की तैयारी चल रही है। इस पहल के सूत्रधार पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल ने खुद इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा- नई पार्टी का गठन अंतिम चरण में है। जल्द इसका नाम घोषित कर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मारकंडा के मुताबिक तीसरे मोर्चे के लिए पार्टी का संविधान तैयार किया जा रहा है और संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उनका दावा है कि प्रदेश के 12 में से 10 जिलों में कई बड़े चेहरे इस थर्ड फ्रंट से जुड़ने को तैयार हैं। हालांकि, सोलन और सिरमौर जिलों में अभी बड़े राजनीतिक चेहरों की तलाश जारी है। इन दोनों जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं से बातचीत की जाएगी। दरअसल, तीसरे मोर्चे की इस कवायद के पीछे दोनों प्रमुख दलों से नाराज नेताओं की नाराजगी को राजनीतिक ताकत में बदलने की रणनीति दिखाई दे रही है। मारकंडा का कहना है कि प्रदेश की जनता लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा की राजनीति से निराश हो चुकी है और अब एक नए विकल्प की तलाश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में कुल्लू में हुई एक अहम बैठक में करीब 22 पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और पूर्व सांसद शामिल हुए थे। इनमें ज्यादातर ऐसे नेता थे जो भाजपा से नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि, मारकंडा फिलहाल किसी भी नेता का नाम सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जिस दिन शिमला में पार्टी का औपचारिक ऐलान होगा, उसी दिन सभी बड़े चेहरे मंच पर नजर आएंगे। इन जिलों में तीसरे मोर्चे की बैठके सूत्रों के अनुसार तीसरे मोर्चे के नेता पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई जिलों में सक्रिय हैं और कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर तथा कांगड़ा जिलों में बैठकों के जरिए राजनीतिक जमीन तैयार की जा चुकी है। वीरभद्र सिंह समर्थक भी संपर्क में सूत्रों का दावा है कि तीसरे मोर्चे के संपर्क में केवल कांग्रेस-भाजपा के असंतुष्ट नेता ही नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समर्थक भी शामिल है। कुल्लू की मीटिंग में भी कुछ वीरभद्र सिंह समर्थक शामिल हुए। इस वजह से भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं ज्यादा तेज है। टिकट विवाद को बड़ी वजह माना जा रहा तीसरे मोर्चे के उभरने के पीछे भाजपा के भीतर टिकट विवाद को बड़ी वजह माना जा रहे हैं। फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव के बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा ने उपचुनाव के दौरान कई पुराने नेताओं की टिकट काटकर कांग्रेस के 6 बागी विधायकों और पार्टी में शामिल 3 निर्दलीय को टिकट दिया था। इससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हुई। सूत्रों का दावा है कि जिन 9 नेताओं की टिकट कटी थी, उनमें से 7 नेता कुल्लू की मीटिंग में शामिल हुए। दिसंबर 2022 के चुनाव में भी BJP ने 8 सीटिंग MLA की टिकट काटी यह असंतोष केवल उपचुनाव तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अपने आठ MLA के टिकट काटे थे। ऐसे नेताओं पर भी तीसरे मोर्चे की पैनी नजर है। मरकंडा खुद भी टिकट कटने के बाद बीजेपी से बागी हुए डॉ. रामलाल मारकंडा खुद भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भाजपा से अलग हुए थे। टिकट कटने के बाद उन्होंने बगावत कर निर्दलीय उपचुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। अब वह इसी असंतोष को संगठित कर एक नई राजनीतिक ताकत खड़ी करने की कोशिश में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस और भाजपा से नाराज नेताओं के साथ वन-टू-वन मुलाकात कर उन्हें इस मंच से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। फिलहाल हिमाचल के राजनीतिक गलियारों में तीसरे मोर्चे की चर्चा तेजी से हो रही है। हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि यह पहल केवल असंतुष्ट नेताओं का मंच बनकर रह जाती है या फिर राज्य की पारंपरिक दो-दलीय राजनीति को चुनौती देने वाला मजबूत राजनीतिक विकल्प बन पाती है। लेकिन इतना जरूर है कि यदि बड़े राजनीतिक चेहरे इस मंच से जुड़ते हैं, तो आने वाले चुनावों में हिमाचल की राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं।