हिमाचल प्रदेश के मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का समापन हो गया है। इसके बाद लगभग 200 देवी-देवता अपने मूल स्थानों को लौट गए। सात दिवसीय इस महोत्सव के दौरान ‘छोटी काशी’ देवी-देवताओं की उपस्थिति से देवमयी हो उठी थी। उनके प्रस्थान के बाद शहर में शांति का माहौल छा गया है। बता दें कि, ये देवी-देवता प्रतिवर्ष शिवरात्रि महोत्सव के दौरान ‘छोटी काशी’ में पधारते हैं। इस अवधि में ढोल-नगाड़ों, करनाल, शहनाई और रणसिंगों के समवेत स्वरों से मंडी शहर गूंज उठता है, जिससे उत्सव का माहौल बना रहता है। चौहाटा की जातर में देवताओं का दरबार सजा देवी-देवताओं के लौटने के साथ ही शहर में उत्सव की रौनक कम हो जाती है। रविवार को चौहाटा की जातर में देवताओं का दरबार सजा था, जहां उनके दर्शनों के लिए भारी भीड़ उमड़ी। मंडी जनपद के बड़ादेव कमरूनाग भी टारना मंदिर का अपना आसन छोड़कर देवी-देवताओं को विदा करने के लिए चौहाटा की जातर में पहुंचे थे। उन्होंने कुछ देर के लिए सेरी चानणी की पौड़ियों पर आसन ग्रहण किया। यहां उनके दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार दोपहर बाद तक गांधी चौक तक लगी रही। देव कमरूनाग 17 फरवरी के बाद टारना की पहाड़ी से उतरे थे और अन्य देवी-देवताओं से मिलने के बाद यजमानों के घरों की ओर प्रस्थान किया। नगर परिक्रमा में सुख-समृद्धि की कामना ‘छोटी काशी’ की खुशहाली और समृद्धि के लिए देव आदि ब्रह्मा ने ‘कार’ बांधी। देवता के गूर ने रथ के साथ शहर की परिक्रमा की और शहरवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछालकर बुरी शक्तियों को दूर रहने का आह्वान किया। इससे पहले, मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त अपूर्व देवगन ने चौहाटा बाजार में उपस्थित देवी-देवताओं को चादरें और पूजा सामग्री अर्पित की। इसके उपरांत, देवलू नाचते-गाते हुए अपने देवी-देवताओं के साथ अपने-अपने गांवों को लौट गए। शिवरात्रि महोत्सव की अंतिम जलेब (शोभायात्रा) थोड़ी देर में निकाली जाएगी, जिसमें राज्यपाल शिरकत करेंगे और मेले का औपचारिक समापन करेंगे। यहां देखें फोटो…

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