हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा में सुधार के लिए इसी शैक्षणिक सत्र से 130 सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है। सरकार के इस निर्णय को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने CBSE से संबद्ध स्कूलों के लिए अलग से टीचरों की नियुक्ति के लिए चयन परीक्षा लेने का फैसला लिया है। शिक्षा बोर्ड ने 5,700 पदों के लिए टीचरों से आवेदन मांग रखे हैं। मगर अब तक लगभग 1,500 टीचरों ने ही CBSE स्कूलों में टीचिंग के लिए आवेदन किया है। अब आवेदन के कुल 4 दिन बचे हैं। ऐसे में यदि 5700 पदों के लिए पात्र शिक्षक नहीं मिलते है तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। इस बीच शिक्षक संगठनों ने CBSE स्कूलों में टीचर भर्ती प्रक्रिया का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। शिक्षक संघों का कहना है कि पहले ही वे कमीशन पास करके आए हैं और अब दोबारा उनकी परीक्षा लेना उनके अनुभव और सम्मान को चुनौती देने जैसा है। दोबारा परीक्षा में बैठना अपमानजनक: चौहान हिमाचल गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन (HGTU) के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने शिक्षकों से परीक्षा का बहिष्कार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि, ‘लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को परीक्षा में बैठाना अपमानजनक है। जो शिक्षक परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें अनावश्यक रूप से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा, भले ही वे अपने कार्य में दक्ष हों।’ 130 सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू बता दें कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की गिरती एनरोलमेंट रोकने और क्वालिटी एजुकेशन के लिए 130 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला लिया है। अभी तक ये स्कूल हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPSEB) के अधीन थे। मगर अब इनकी संबद्धता CBSE बोर्ड से कर दी गई है। अलग से टीचरों की भर्ती का फैसला राज्य सरकार ने CBSE बोर्ड से संबद्धता प्राप्त इन स्कूलों में अलग से टीचरों की भर्ती का निर्णय लिया है। हालांकि टीचरों का चयन मौजूदा अध्यापकों में से ही किया जाएगा। मगर शिक्षक संघ के विरोध के कारण विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठता का डर भी बड़ी वजह चयन प्रक्रिया को लेकर एक और बड़ा मुद्दा सीनियोरिटी का है। शिक्षकों को आशंका है कि सीबीएसई सब-कैडर में शामिल होने पर उनकी मौजूदा वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। यही डर कई शिक्षकों को आवेदन करने से रोक रहा है। राज्य लेक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय नेगी के मुताबिक, अधिकतर वही शिक्षक आवेदन कर रहे हैं जो दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात हैं। वे इसे जिला मुख्यालय में स्थानांतरण का अवसर मान रहे हैं, क्योंकि अधिकतर सीबीएसई स्कूल वहीं स्थित हैं।