हिमाचल विधानसभा के उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान हिमाचल के लिए आरडीजी बहाल करने के सरकारी प्रस्ताव का विरोध कर भाजपा ने राज्य के हितों के खिलाफ अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पठानिया ने धर्मशाला में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने पूछा कि भाजपा ने आरडीजी के मुद्दे पर अब तक अपना रुख स्पष्ट क्यों नहीं किया है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या भाजपा वास्तव में आरडीजी को बंद करने के पक्ष में है। पठानिया ने भाजपा की दोहरी राजनीति पर प्रहार करते हुए कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, तब हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों का हवाला देकर पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग के सामने आरडीजी की पुरजोर वकालत की गई थी। जयराम सरकार में हिमाचल को मिला था 56 हजार का आरडीजी जयराम ठाकुर के कार्यकाल में हिमाचल को 56 हजार करोड़ रुपए की आरडीजी और 14 हजार करोड़ रुपए का जीएसटी कंपनसेशन मिला था, तब भाजपा को इस पर कोई आपत्ति नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज केवल इसलिए विरोध किया जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। पठानिया ने स्पष्ट किया कि आरडीजी हिमाचल का कोई खैरात नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिला एक संवैधानिक अधिकार है। भाजपा नेता केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि को आर्थिक मदद बताकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, जबकि यह पैसा प्रदेश का हक है। पठानिया ने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले आपदा प्रभावितों को विशेष आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव का भी भाजपा विधायकों ने समर्थन नहीं किया था। 26683 करोड़ का राजस्व मिला : पठानिया मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए पठानिया ने कहा कि संसाधनों के सही इस्तेमाल से राज्य को पिछले तीन वर्षों में 26 हजार 683 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। सरकार बीबीएमबी परियोजनाओं में 12 प्रतिशत निशुल्क ऊर्जा रॉयल्टी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बकाया 6 हजार 500 करोड़ रुपये हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में धर्मशाला में पर्यटन निगम का मुख्यालय स्थानांतरित किया गया है।