हिमाचल प्रदेश में आर्थिक तंगी का हवाला देने वाली कांग्रेस सरकार अब अपने ही फैसले को लेकर सवालों के घेरे में है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल की बेटी गीतांजली कश्यप को सेवानिवृत्ति से पहले छह महीने का सेवाविस्तार दे दिया गया है। गीतांजली कश्यप जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) सोलन में लेक्चरर (साइकोलॉजी) के पद पर कार्यरत हैं और इसी माह रिटायर होने वाली थीं। सरकार ने उन्हें 1 मार्च से 31 अगस्त तक सेवा विस्तार प्रदान किया है। सोशल मीडिया में किरकिरी सरकार के इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दल और कई युवा संगठनों का आरोप है कि एक ओर सरकार आर्थिक संकट का हवाला देकर खर्चों में कटौती की बात करती है, वहीं दूसरी ओर अपने प्रभावशाली लोगों को पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार दे रही है। 10 लाख बेरोजगारों से धोखा प्रदेश में 10 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा बार-बार चर्चा में रहता है। ऐसे में सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा नियुक्त करना युवाओं के अवसरों को सीमित करने जैसा माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि पढ़े-लिखे युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते-करते उम्र पार कर रहे हैं, जबकि सरकार रिटायर कर्मचारियों को पेंशन के साथ-साथ वेतन भी दे रही है।यह पहला मामला नहीं है जब सेवाविस्तार को लेकर सरकार पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई सेवानिवृत्त अधिकारियों को पुनरोजगार दिए जाने को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ चुकी है। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल का पक्ष लेने का बार बार प्रयास किया गया। मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया।