तिब्बतियों के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु परम पावन 14वें दलाई लामा शुक्रवार, 13 फरवरी को दक्षिण भारत की दो महीने लंबी यात्रा के बाद कांगड़ा जिले के धर्मशाला लौट आए। बता दे कि कांगड़ा के गग्गल हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए तिब्बतियों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित होने के बाद यह उनका पहला धर्मशाला आगमन है। इस दौरान हवाई अड्डे के बाहर सैकड़ों तिब्बती समुदाय के लोग पारंपरिक सफेद स्कार्फ (खाता) और स्वागत संदेश लिखे बैनर लिए खड़े थे। दलाई लामा के बाहर आने पर श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद लिया। दक्षिण भारत की यात्रा पर थे बता दे कि दलाई लामा कर्नाटक के मुंडगोड स्थित दोगुलिंग तिब्बती बस्ती के ड्रेपुंग मठ में लगभग दो महीने तक रहे। उनकी यह 47 दिवसीय यात्रा 12 दिसंबर को शुरू होकर 9 फरवरी को समाप्त हुई। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कई कार्यक्रमों में हुआ शामिल यात्रा के दौरान, उन्होंने कई भिक्षुओं को ‘गेलोंग’ दीक्षा प्रदान की और वार्षिक मठवासी वाद-विवाद सत्रों की अध्यक्षता की। 8 फरवरी को, उन्होंने अपने दिवंगत बड़े भाई कासूर ग्यालो थोनडुप की प्रथम पुण्य स्मृति प्रार्थना सभा में भाग लिया, जिसमें 8,500 लोग उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, 24 दिसंबर को ड्रेपुंग त्रिपा के अभिषेक और दीर्घायु प्रार्थना समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की। 15,935 लोगों को आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदान किया यात्रा के दौरान दलाई लामा ने कुल 15,935 लोगों को आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदान किया। इनमें 11,870 तिब्बती एवं हिमालयी क्षेत्र के श्रद्धालु, 2,584 भारतीय श्रद्धालु और 1,480 विदेशी नागरिक शामिल थे।यात्रा की शुरुआत में 12 दिसंबर को आयोजित स्वागत समारोह में लगभग 8,000 श्रद्धालु उपस्थित थे। वहीं, 14 दिसंबर को लामा त्सोंगखापा की पुण्यतिथि (गदेन नगछोद) के अवसर पर यह संख्या बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई थी।

Spread the love