हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर संशय बना हुआ है, जबकि हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले इलेक्शन कराने के आदेश दे रखे हैं। मगर इसकी संभावना बहुत कम है। सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट (SC) में चुनौती देने की तैयारी में है। इसे लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है। यह चुनौती रणनीति के तहत फरवरी के तीसरे सप्ताह तक संभावित है, क्योंकि हाईकोर्ट ने 28 फरवरी तक सभी पंचायतों और नगर निकायों में आरक्षण रोस्टर लगाने के आदेश दे रखे हैं। तय तारीख तक रोस्टर नहीं लगाया गया तो कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट होगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटिशन) होने की बात कहकर सरकार कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट से बचने का तर्क हाईकोर्ट में रख सकती है। इस बाबत, जब हिमाचल के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर अभी फैसला नहीं हुआ है। DC-SDM ने वोटर लिस्ट नोटिफाई नहीं की वहीं हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद चुनावी प्रक्रिया जमीन पर आगे बढ़ती नजर नहीं आ रही है। हाईकोर्ट के आदेशों पर इलेक्शन कमीशन ने सभी जिलों के DC और SDM को 30 जनवरी तक वोटर लिस्ट नोटिफाई करने को कहा था। मगर 9 जिलों के DC और लगभग 45 SDM ने अब तक वोटर लिस्ट नोटिफाई नहीं की है। इससे इलेक्शन कमीशन वोटर लिस्ट की प्रिंटिंग शुरू नहीं कर पा रहा है। इससे राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। 3 जिलों के DC ने फॉर्म-15 नोटिफाई किया स्टेट इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, अब तक चंबा, शिमला और लाहौल-स्पीति जिले के DC ने ही पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट के साथ फॉर्म-15 नोटिफाई किया है। DC को पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट नोटिफाई करनी होती है, जबकि निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट के साथ फॉर्म-17 SDM द्वारा नोटिफाई किया जाता है। मगर लगभग 20 SDM ने ही नगर निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट नोटिफाई की है। अधिकांश DC-SDM को हाईकोर्ट और स्टेट इलेक्शन कमीशन के आदेशों की भी परवाह नहीं है, जबकि हाईकोर्ट ने इलेक्शन कमीशन और सरकार को समन्वय बनाकर चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। संसद में पास डिजास्टर एक्ट का हवाला दे सकती है सरकार सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में तर्क दे सकती है कि पंचायत चुनाव स्टेट के पंचायतीराज एक्ट के तहत होने हैं, जबकि ‘डिजास्टर एक्ट’ देश की संसद में बना है। सुप्रीम कोर्ट में डिजास्टर एक्ट का तर्क देकर सरकार एसएलपी दायर कर सकती है। ऐसे में कोर्ट में मामला जाने से चुनाव 30 अप्रैल से पहले होने की संभावना कम नजर आ रही है। हाईकोर्ट के ऑर्डर आने के बाद सीएम सुक्खू डिजास्टर एक्ट की अनदेखी की बात कह चुके हैं और तब उन्होंने हाईकोर्ट के ऑर्डर पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में यदि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अप्रैल में चुनाव नहीं हुए, तो 25 मई के बाद हिमाचल में कभी भी प्री-मानसून दस्तक दे सकता है। मानसून में चुनाव कराना संभव नहीं होगा। अगस्त में स्टेट इलेक्शन कमीशनर अनिल खाची रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में जब तक नए आयुक्त की तैनाती नहीं हो जाती, तब तक चुनाव संभव नहीं होंगे। इससे लंबे समय तक भी चुनाव टल सकते हैं। 3577 पंचायतों और 73 निकायों में होने हैं चुनाव प्रदेश में कुल 3577 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 और 47 नगर निकायों का 18 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। इनमें सरकार ने एडमिनिस्ट्रेटर तैनात कर दिए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में एडमिनिस्ट्रेटर की तैनाती अच्छी नहीं मानी जाती है। ऐसे में यदि 30 अप्रैल से पहले चुनाव नहीं हुए, तो लंबे समय तक चुने हुए प्रतिनिधियों के स्थान पर एडमिनिस्ट्रेटर का बने रहना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय स्वशासन कमजोर होता है, बल्कि जनता की भागीदारी भी खत्म हो जाती है।