हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पहले ही दबाव से गुजर रही है। इस बीच, केंद्र रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को बंद करके राज्य सरकार की वित्तीय उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। हिमाचल सरकार 31 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रही थी, क्योंकि 1 अप्रैल से RDG मिलने थी, लेकिन अब यह उम्मीद टूट गई है। राज्य सरकार को RDG के रूप में इस साल 10 हजार करोड़ रुपए और अगले पांच सालों के दौरान 40 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी। मगर 16वें वित्त आयोग ने इस अनुदान को बंद कर दिया है। 14वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को RDG के रूप में 40 हजार 624 करोड़ रुपये मिले थे। 15वें वित्त आयोग में यह राशि घटकर 37 हजार 199 करोड़ रुपए की गई। साल 2021-22 में अकेले 10 हजार 249 करोड़ रुपए RDG के तौर पर हिमाचल को मिले, साल 2025-26 में यह कम होकर 3258 करोड़ रुपए रह गई। इसे देखते हुए हिमाचल सीएम ने कई बार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 16वें वित्त आयोग के चेयरमैन डॉ. अरविंद पनगढ़िया से कई बार मुलाकात की और हर साल 10 हजार करोड़ रुपए की RDG देने का आग्रह किया। मगर RDG बढ़ाना तो दूर, इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। एक लाख करोड़ के कर्ज में दबा राज्य हिमाचल प्रदेश पर पहले ही 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है। ऐसे में RDG को बंद करके केंद्र ने एक और झटका दिया है। इससे पहले केंद्र सरकार हिमाचल की कर्ज लेने की सीमा में 5500 करोड़ रुपए की कटौती कर चुकी है। GST कंपनसेशन-NPA की मैचिंग ग्रांट भी बंद जून 2022 तक हिमाचल को हर साल 3000 करोड़ रुपए से अधिक का GST कंपनसेशन मिलता था। अब यह भी बंद है। इसके अलावा, 1700 करोड़ रुपए की न्यू पेंशन स्कीम (NPA) से जुड़ी मैचिंग ग्रांट भी समाप्त कर दी गई है। आपदा की मार और कर्मचारियों का बकाया एक ओर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद घट रही है, तो दूसरी ओर बार-बार की प्राकृतिक आपदाएं राज्य के जख्मों को और गहरा कर रही हैं। साल 2023 में 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान बरसात में हुआ, जबकि 2025 में भी 5500 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। इससे राज्य सरकार की आर्थिक मोर्चे पर परेशानियां बढ़ती जा रही है। 9500 करोड़ कर्मचारी-पेंशनरों का बकाया इसके साथ ही, राज्य सरकार पर करीब 9500 करोड़ रुपए कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया हैं, जिन्हें चुकाना एक बड़ी चुनौती हो गया है। यह देनदारी जनवरी 2016 के नए वेतनमान की है। इस बीच 2026 में नया पे-कमीशन देय हो गया है। सूत्रों के अनुसार- कांग्रेस सरकार उम्मीद में थी कि एक अप्रैल के बाद RDG मिलने पर कर्मचारी-पेंशनर की देनदारियों का भुगतान करेंगे। मगर RDG खत्म होने के बाद कर्मचारी-पेंशनर के बकाया पर भी संकट आ गया है आर्थिक मोर्चे पर कठिन परीक्षा कुल मिलाकर RDG बंद होना, कर्ज की सीमा घटाना, GST कंपनसेशन खत्म होना और आपदाओं की मार इन सबने हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति को कठिन दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले समय में राज्य सरकार के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है, क्योंकि हिमाचल सरकार पहले ही कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुका रही है। अब उम्मीदें सिर्फ वित्त आयोग के बजट पर टिकी है। वित्त आयोग के बजट में यदि अच्छी बढ़ौतरी नहीं की गई तो आर्थिक मोर्चे पर राज्य सरकार की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ेगी।

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