केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश के लिए बड़ी घोषणाओं के अभाव पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। शाहपुर के कांग्रेस विधायक और विधानसभा के उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रदेश के भाजपा सांसदों की आलोचना की। पठानिया ने कहा कि दिल्ली में हिमाचल के सात सांसद मौजूद होने के बावजूद, रेल विस्तार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बजट भाषण में कोई उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के साथ अन्याय करार दिया। विधायक बोले- प्रदेश की आवाज मजबूती से क्यों नहीं उठाई विधायक ने सवाल उठाया कि जब हिमाचल की जनता ने चार लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसद चुनकर दिल्ली भेजे हैं, तो प्रदेश की आवाज मजबूती से क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने पूछा कि क्या रेल मंत्री के समक्ष हिमाचल की मांगें प्रभावी ढंग से नहीं रखी गईं। पठानिया ने कांगड़ा घाटी रेलवे की अनदेखी पर भी चिंता व्यक्त की। अंग्रेजों के समय की पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरो गेज रेल लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने और इसके विस्तार की मांग दशकों पुरानी है। चक्की पुल बहने के बाद से इस लाइन की स्थिति और खराब हो गई है, लेकिन बजट में इसके लिए कोई विशेष पैकेज घोषित नहीं किया गया, जिससे कांगड़ा और चंबा के लोग निराश हैं। केवल सिंह बोले- बातें केवल कागजी साबित होंगी केवल पठानिया ने आगे कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर आधारित है। एक मजबूत रेल नेटवर्क के बिना पर्यटन को बढ़ावा देने की बातें केवल कागजी साबित होंगी। पठानिया ने मौजूदा रेल परियोजनाओं की स्थिति पर भी ध्यान दिलाया। भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन पर काम जारी है, लेकिन इसकी गति धीमी है और इसे तेजी देने के लिए बड़े फंड की आवश्यकता है। इसी तरह, औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन के लिए भी समयसीमा तय करने की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई। पठानिया ने पठानकोट-जोगिंद्रनगर हेरिटेज ट्रैक की खस्ताहाल स्थिति और बाधित सेवाओं का भी जिक्र किया। इस ट्रैक की मरम्मत और विस्तार पर ठोस घोषणा की उम्मीद थी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेह-लद्दाख रेल लाइन और राज्य के अंदरूनी इलाकों को जोड़ने की उम्मीद भी बजट से पूरी नहीं हुई।

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