हिमाचल प्रदेश की 3577 पंचायतों में 30 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों का 5 साल का कार्यकाल आज पूरा हो रहा है। इसी के साथ आज सभी पंचायतें स्वतः भंग हो जाएंगी। इससे प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य (BDC) और जिला परिषद पदमुक्त हो जाएंगे। प्रदेश में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब सभी पंचायतें निर्वाचित नहीं होंगी। इसका असर वित्त आयोग की ग्रांट पर पड़ सकता है, क्योंकि 15वें वित्त आयोग की गाइडलाइन में बजट के लिए पंचायतों का निर्वाचित होना जरूरी है। थोड़ी राहत की बात यह है कि मौजूदा वित्त वर्ष को 171 करोड़ रुपए की ग्रांट पहले ही मिल चुकी है। 31 मार्च के बाद जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक इस ग्रांट पर कट लग सकता है, क्योंकि 1 अप्रैल से 16वां वित्त आयोग लागू होना है। पंचायतों में एडमिनिस्ट्रेटर लगाने की तैयारी पंचायतें भंग होने के बाद राज्य सरकार इनमें एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) नियुक्त करेगी। इसके बाद पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था एडमिनिस्ट्रेटर चलाएंगे। पंचायत के विकास कार्य से जुड़े फैसले एडमिनिस्ट्रेटर लेंगे। पंचायतीराज विभाग ने एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति को लेकर सरकार को 2 प्रस्ताव भेज रखे हैं। पहले प्रस्ताव में पंचायत सेक्रेटरी को ही एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की बात कही गई है, जबकि दूसरे प्रस्ताव में 3 मेंबर की कमेटी बनाने का सुझाव है। इसमें संबंधित क्षेत्र के स्कूल प्रिंसिपल या हेडमास्टर में से किसी एक को प्रशासक बनाया जाए। कमेटी में ग्राम रोजगार सेवक (GRS) और पंचायत सचिव को सदस्य बनाया जाए। इस पर आज या सोमवार को फैसला संभावित है। इसके बाद पंचायत में होने वाले सभी विकास कार्य, योजनाओं की स्वीकृति, भुगतान और प्रशासनिक फैसले एडमिनिस्ट्रेटर के हाथ में होंगे। सरकार को 15 करोड़ की बचत होगी हिमाचल सरकार पंचायत जनप्रतिनिधियों के मानदेय पर हर महीने लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च करती है। ऐसे में जब तक चुनाव नहीं होते, तब तक आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार के 5 करोड़ रुपए की बचत होगी। वैसे हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। इस लिहाज से तीन महीने में 15 करोड़ की बचत होगी। पहले, 45 पंचायतों में लग चुके एडमिनिस्ट्रेटर राज्य की सभी पंचायतों में पहली बार एडमिनिस्ट्रेटर लगेंगे, जबकि दुर्गम क्षेत्र लाहौल-स्पीति और पांगी की लगभग 45 पंचायतों में 2021 में भी कोरोना काल में एडमिनिस्ट्रेटर लग चुके हैं। मगर तब यह व्यवस्था राज्य के दुर्गम क्षेत्रों की चुनिंदा पंचायतों तक सीमित थी। एडमिनिस्ट्रेटर की नियुक्ति क्यों होगी? स्टेट इलेक्शन कमीशन दिसंबर में पंचायतों के साथ नगर निकाय चुनाव कराने की तैयारी में था। मगर सरकार आपदा का हवाला देते हुए पंचायत चुनाव को तैयार नहीं हुई। इससे मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर फैसला सुनाते हुए 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव कराने के आदेश दे रखे हैं। तय समय पर चुनाव नहीं होने से हिमाचल में एडमिनिस्ट्रेटर लगाने की नौबत आई है, जिसे लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं माना जाता। 47 निकायों में प्रशासक लगा चुकी सरकार पंचायतों से पहले राज्य के 47 नगर निकायों में सरकार तीन दिन पहले ही एडमिनिस्ट्रेटर लगा चुकी है। वहीं, बीते दिनों कुछ पंचायत प्रधान मंत्री से मिलकर उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का अनुरोध कर चुके हैं।