भारत सरकार और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच बुधवार को फॉरेन ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन हो गया है। इस समझौते के बाद EU के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है। इससे हिमाचल की 5500 करोड़ रुपए की एपल इंडस्ट्री के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब पर भी संकट खड़ा हो गया है। EU से अब सस्ता सेब भारत के बाजारों में आएगा। एक महीना पहले मोदी सरकार ने न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 25 प्रतिशत की थी। अब EU के 27 देशों के लिए भी इम्पोर्ट ड्यूटी घटा दी गई है। हालांकि, EU के साथ एग्रीमेंट 2027 में लागू होना है। एग्रीमेंट के मुताबिक- शुरुआत में यूरोपीय संघ से 50 हजार टन सेब आएंगे। यह मात्रा अगले 10 सालों में बढ़कर सालाना एक लाख टन हो जाएगी। इन पर 20 फीसदी शुल्क लगेगा। इनका मिनिमम इम्पोर्ट प्राइस (MIP) 80 रुपए प्रति किलोग्राम होगा। 2024 में देश में 5 हजार टन सेब आयात भारत में वर्तमान में सेब के आयात पर करीब 50 फीसदी शुल्क लगता है। साल 2024 में भारत ने करीब 5.19 लाख टन सेब का आयात किया था। इसमें से 1 लाख 33 हजार 447 टन (करीब 26 फीसदी) ईरान से आया, जबकि करीब 1 लाख 16 हजार 680 टन (23 फीसदी) तुर्किए और 42 हजार 716 टन (8.2 फीसदी) अफगानिस्तान से आया। यूरोपीय संघ का योगदान करीब 56 हजार 717 टन (11.3 फीसदी) है। इम्पोर्ट ड्यूटी घटने के बाद यह बढ़ जाएगा। हिमाचल के बागवान चिंतित न्यूजीलैंड और यूरोपीय यूनियन के साथ FTA से भारत में सस्ते सेब की बाढ़ की संभावना है। इससे हिमाचल के बागवान चिंतित हैं। बीते सप्ताह सेब बागवान राज्य सचिवालय के बाहर इसके विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों से किया वादा मोदी ने नहीं निभाया हिमाचल के बागवानों में इससे मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्त रोष है, क्योंकि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने हमीरपुर जिला के सुजानपुर रैली में साल 2014 में सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का वादा किया था। मोदी सरकार द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा तो पूरा नहीं किया गया, मगर ड्यूटी कम जरूर की जा रही है। न्यूजीलैंड-EU की आड़ में दूसरे देश भी ड्यूटी घटाने को दबाव बनाएंगे न्यूजीलैंड और EU की आड़ में अब दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी कम करने का दबाव बनाएंगे। भारत के बाजारों में विदेशी सेब आने से देश में पैदा होने वाले सेब को उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। हिमाचली सेब के लिए खतरा: बिष्ट प्रोग्रेसिव ग्रोअर एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया- यह हिमाचल के सेब के लिए बड़ा खतरा है। इससे देश के बाजारों में विदेशी सेब थोक में आएगा और हिमाचली सेब को अच्छे बाजार भाव नहीं मिलेगी। ढाई लाख परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आएगा: राठौर ठियोग से कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा- केंद्र ने न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाई। अब EU के सेब पर कम की गई। केंद्र सरकार ने ठान लिया है हिमाचल के सेब उद्योग को खत्म किया जाएगा। उन्होंने इसका विरोध किया। राठौर ने कहा कि हिमाचल भाजपा के नेताओं को यह मसला केंद्र से उठाना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया तो ढाई लाख से ज्यादा परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। बागवानों के विरोध की एक और वजह हिमाचल में अभी प्रति हेक्टेयर 7 से 8 मीट्रिक टन सेब की पैदावार होती है, जबकि न्यूजीलैंड में प्रति हेक्टेयर 60 से 70 मीट्रिक टन सेब पैदा हो रहा है। इसी तरह, चीन, अमेरिका, ईरान इत्यादि देशों की भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल होने से वहां भी 40 से 70 मीट्रिक टन सेब प्रति हेक्टेयर पैदा हो रहा है। हिमाचल में विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रति किलो सेब तैयार करने पर लगभग 27 रुपए की लागत आती है। इससे हिमाचल के सेब बागवानों को तभी फायदा हो पाता है, जब यहां के बागवानों का सेब कम से कम 50 से 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके।

Spread the love