हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा विद्या नेगी ने मनाली में भारी बर्फबारी के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय नेताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के इस समय में राजनीति करना अनुचित है, क्योंकि यह मामला फंसे हुए बच्चों और बुजुर्गों की जिंदगी से जुड़ा है। नेगी ने NHAI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर को हुई बर्फबारी के बाद विभाग के कर्मचारी 25 दिसंबर को सक्रिय हुए, जिससे राहत कार्यों में देरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि पतलीकूहल से मनाली तक का मात्र 15 किलोमीटर का रास्ता भी NHAI साफ नहीं कर पाया, जबकि यह काम मशीनरी से दो घंटे में किया जा सकता था। उन्होंने मौके पर किसी बड़े अधिकारी की अनुपस्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मनाली के स्थानीय नेताओं और विपक्ष की भूमिका पर भी टिप्पणी की। नेगी ने कहा कि कुछ लोग केवल बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि उन्हें फंसे हुए पर्यटकों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग कड़ाके की ठंड में सड़कों पर फंसे हुए हैं और उन्हें तत्काल मदद की आवश्यकता है। विद्या नेगी ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि NHAI केवल केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करता है और राज्य सरकार की बात नहीं सुनता। उन्होंने राज्यपाल से NHAI को अपनी जिम्मेदारी निभाने का आदेश देने का आग्रह किया, क्योंकि यह लोगों की जान-माल से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उझी घाटी के बागवानों का दर्द NHAI के इतिहास विवादित रहा है जुलाई माह की बाढ़ का उदाहरण सामने है । जुलाई में भी सड़कों की बहाली समय पर नहीं की गई थी, जिससे उझी घाटी के बागवानों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था।”सड़कें ठीक होने के बावजूद उन्हें खोला नहीं गया था। बागवान गुहार लगाते रहे लेकिन विभाग टस से मस नहीं हुआ। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ और स्थानीय जनता इस लापरवाही के गवाह हैं।” महिला आयोग की अध्यक्षा ने कहा कि भगवान जानता है कौन क्या कर रहा है। यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि मानवता दिखाने का है। NHAI की लापरवाही ने देवभूमि की छवि और पर्यटन को भारी चोट पहुंचाई है।

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