हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार के तीन साल पूरे होने पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने धर्मशाला में वीरवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आपदा राहत कोष के दुरुपयोग और कांग्रेस के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों को उजागर किया। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता या मंत्री के खिलाफ एसआईटी जांच के आदेश दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही विजिलेंस जांच की सुगबुगाहट हुई, संबंधित नेता ने हाईकमान को धमकी दी कि “जांच तत्काल रोको, नहीं तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस महानिदेशक (DGP) ने एक मामले में एसआईटी गठन के आदेश दिए थे। हालांकि, उनके अनुसार, दबाव के कारण सरकार को यह कदम वापस लेना पड़ा और जांच रोक दी गई। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि वह कौन सी शिकायत थी और उसे क्यों दबाया गया, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जयराम के 5 बड़े आरोप और उनके मायने 1. आपदा के पैसे से जश्न: प्रभावितों के हक के 10 करोड़ सरकार की सालगिरह पर उड़ाए जयराम ठाकुर ने दस्तावेज के हवाले से दावा किया कि सरकार ने 3 साल के जश्न पर जो पैसा खर्च किया, वह ‘डिजास्टर फंड’ से निकाला गया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 10 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जश्न पर खर्च की गई, जो आपदा प्रभावित परिवारों को मिलनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि एचआरटीसी (HRTC) ने बसों के लिए 2 करोड़ रुपए का बिल डीसी मंडी को भेजा है। जबकि एचआरटीसी की बीओडी (BoD) का नियम है कि ऐसी बुकिंग पर 50 प्रतिशत एडवांस जमा होना चाहिए, जिसे दरकिनार किया गया। 2. सीक्रेट फाइल और धमकी: ‘जांच रोको’ सबसे सनसनीखेज आरोप कांग्रेस के आंतरिक कलह पर है। जयराम ने कहा कि डीजीपी ने एक मामले में एसआईटी गठन के आदेश दिए थे। विजिलेंस जांच की सुगबुगाहट थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही जांच की बात उठी, संबंधित वरिष्ठ नेता/मंत्री ने हाईकमान को दो टूक कह दिया- “जांच तत्काल रोको, नहीं तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” इसे लेकर जयराम ने पूछा है कि आखिर वह कौन सी शिकायत थी और उसे क्यों दबाया गया? इसे सार्वजनिक किया जाए। 3. ‘सुपर सीएम’ बने अधिकारी: मुख्यमंत्री के गहरे राज अफसरों के पास नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार चुने हुए प्रतिनिधि नहीं, बल्कि कुछ अधिकारी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि “कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को उंगलियों पर नचा रहे हैं। इन अधिकारियों के पास सीएम के कई ‘गहरे राज’ हैं, जिसकी वजह से सीएम तनाव में रहते हैं और मंच से कुछ भी बोल जाते हैं।” 4. चुनाव टालने का खेल: डिजास्टर एक्ट बना ढाल जयराम ठाकुर ने कहा कि पंचायती राज चुनावों को टालने के लिए सरकार ने ‘डिजास्टर एक्ट’ (Disaster Act) का सहारा लिया है। जयराम का कहना है कि कांग्रेस हार के डर से चुनाव नहीं करवाना चाहती। संगठन में अफरा-तफरी का माहौल है और लोकप्रियता रसातल में जा चुकी है। 5. डिप्टी सीएम का तल्ख भाषण और मंत्रियों में वाकयुद्ध जयराम ने कहा कि हमीरपुर में आयोजित जश्न के दौरान डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री का भाषण काफी तल्ख था। जयराम ने इशारा किया कि मंच पर दिखावा कुछ और था, लेकिन अंदरखाने मंत्रियों में ‘वाकयुद्ध’ (War of Words) छिड़ा हुआ है। आखिर क्यों आक्रामक हैं जयराम चुनावों की आहट: हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नजदीक हैं। सरकार ने आपदा का हवाला देकर इन्हें टाला है। भाजपा इसे मुद्दा बनाकर यह साबित करना चाहती है कि कांग्रेस जनता का सामना करने से डर रही है। कांग्रेस की गुटबाजी: सुक्खू सरकार के तीन साल पूरे होने पर भी डिप्टी सीएम और सीएम खेमे के बीच की तल्खी कम नहीं हुई है। जयराम ‘विजिलेंस जांच’ वाले बयान से इसी आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। केंद्र बनाम राज्य: मुख्यमंत्री अक्सर केंद्र से मदद न मिलने की बात कहते हैं, लेकिन जयराम ने याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के बाद बाहर आकर उन्हें कोसना सीएम की आदत बन गई है, जबकि केंद्र से निरंतर मदद (बाढ़ राहत पैकेज आदि) मिल रही है।